नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के युवाओं को सशक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, क्योंकि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में युवा सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति साबित होंगे। गुरुवार को नई दिल्ली में नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय क्षमता एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसे किसी भी स्थिति में गंवाया नहीं जा सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मांग आधारित कौशल विकास तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं के लिए मजबूत वातावरण तैयार करना आवश्यक है। उनका मानना है कि सशक्त और कुशल युवा ही भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत ने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे आर्थिक विकास और निर्यात के नए अवसर पैदा हुए हैं। इन समझौतों से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। इससे भारतीय उद्यमों को वैश्विक बाजारों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने तथा प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का अवसर प्राप्त होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सहकारी संघवाद की भावना के साथ मिलकर देश की विकास गति को तेज करने के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का साझा लक्ष्य तभी साकार होगा जब सभी राज्य और केंद्र सरकार एकजुट होकर कार्य करें। केंद्र और राज्यों के सामूहिक प्रयास देश की प्रगति को नई दिशा देंगे। इस वर्ष नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक का विषय ‘Inclusive Human Development For Viksit Bharat @2047’ रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक के समग्र विकास और कल्याण को सुनिश्चित करना है, चाहे वह किसी भी आयु वर्ग, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंधित हो।
बैठक में इस दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप देने तथा देश के प्रत्येक नागरिक तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए ठोस और मापनीय परिणामों पर चर्चा की जा रही है। इसमें राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल तथा केंद्रीय मंत्री पदेन सदस्यों के रूप में शामिल हुए। बैठक के दौरान मानव संसाधन विकास को मजबूत करने, भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने, उत्पादक रोजगार बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा विकेंद्रीकृत विकास को गति देने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य, पोषण, सामाजिक कल्याण, समानता और सम्मान सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
देशभर में उद्यमिता को बढ़ावा देने, युवाओं के कौशल विकास को मजबूत करने तथा टिकाऊ रोजगार अवसरों के सृजन के लिए विभिन्न सुझावों पर भी चर्चा की गई। बैठक में सुशासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, साझेदारी आधारित विकास मॉडल, डेटा आधारित व्यवस्था तथा प्रभावी निगरानी तंत्र के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक परिणामकारी बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों की नियमित समीक्षा के लिए जवाबदेही आधारित प्रणाली विकसित करने पर भी विचार किया गया, ताकि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को मापा जा सके। बैठक में राज्यों की विकास दृष्टि को राष्ट्रीय विकास दृष्टि के साथ जोड़ने पर विशेष बल दिया गया, जिससे समावेशी, संतुलित और टिकाऊ विकास का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।

