चिंताओं पर SEBI की नजर
Securities and Exchange Board of India (SEBI) के Chairman Tuhin Kanta Pandey ने कहा है कि Stockbrokers की ओर से नए UPI Merchant Discount Rate (MDR) Framework को लेकर उठाई गई चिंताओं की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं और SEBI इन चिंताओं पर विचार करेगा।
NaBFID Infrastructure Conclave में बयान
Mumbai में NaBFID Infrastructure Conclave 2026 से इतर पत्रकारों से बातचीत में SEBI Chairman ने यह जानकारी दी। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब Stockbrokers और Broking Companies ने UPI MDR के कारण कारोबार की लागत बढ़ने को लेकर सवाल उठाए हैं।
Nithin Kamath ने भी उठाया मुद्दा
Zerodha के CEO Nithin Kamath ने नए Person-to-Merchant UPI Framework का समर्थन करते हुए कहा था कि Digital Payment System के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए यह व्यवस्था जरूरी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने Broking Industry के लिए इसके व्यावहारिक असर को लेकर चिंता भी जताई।
बिना Trade के भी लग सकता है Charge
Kamath के मुताबिक ग्राहक UPI के जरिए Broker Account में पैसा जमा कर सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे उस रकम से Trade करें। ऐसे में यदि UPI Charge Broker पर लागू होता है और इसे ग्राहक से वसूला नहीं जा सकता, तो Broker को बिना Revenue के अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।
₹2 करोड़ तक की संभावित लागत का उदाहरण
Kamath ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में 50 बार ₹2 लाख के UPI Transfer करें और कोई Trade न करें, तो प्रस्तावित MDR के तहत Broker पर करीब ₹2 करोड़ की लागत आ सकती है।
Quarterly Settlement भी चुनौती
उन्होंने Quarterly Settlement (QS) का भी उल्लेख किया, जिसके तहत Brokers को ग्राहकों के अप्रयुक्त फंड वापस करने होते हैं। Kamath ने Broking-related UPI Payments के लिए कम Transaction Cap पर विचार करने का सुझाव दिया है।

