New Delhi,
देश में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं ने मार्च माह में मजबूत प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं की औसत प्रबंधित परिसंपत्तियों (एयूएम) में सालाना आधार पर 17.38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़त मुख्य रूप से फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और थीमैटिक योजनाओं में निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण हुई है। अबेक्कस म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लेक्सी कैप योजनाएं सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी के रूप में उभरी हैं। इन योजनाओं का औसत शुद्ध एयूएम बढ़कर लगभग 5.28 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 4.22 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार इस श्रेणी में 25.10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। फ्लेक्सी कैप योजनाओं का कुल इक्विटी एयूएम में हिस्सा अब 15.75 प्रतिशत हो गया है, जो इनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
कुल इक्विटी एयूएम में भी उल्लेखनीय बढ़त
मार्च 2026 में इक्विटी आधारित योजनाओं का कुल औसत एयूएम बढ़कर लगभग 33.54 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 28.57 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि खुदरा निवेशकों की निरंतर भागीदारी और बाजार में स्थिरता को दर्शाती है, भले ही बीच-बीच में उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो। फ्लेक्सी कैप योजनाओं की तेज वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि निवेशक अब ऐसी निवेश रणनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें विभिन्न बाजार पूंजीकरण, क्षेत्रों और शैलियों में निवेश करने की लचीलापन हो। इसके अलावा, मिड कैप योजनाओं में 22.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इनका एयूएम लगभग 4.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। स्मॉल कैप योजनाओं में 20.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और इनका एयूएम 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, लार्ज और मिड कैप योजनाओं में 23.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ एयूएम 3.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
थीमैटिक योजनाओं की हिस्सेदारी में हल्की कमी
सेक्टोरल या थीमैटिक योजनाएं अब भी बड़ी श्रेणियों में बनी हुई हैं, जिनका औसत एयूएम लगभग 5.01 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, इनकी हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 14.93 प्रतिशत रह गई, जो पहले 15.52 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब केंद्रित निवेश के बजाय संतुलित रणनीति की ओर बढ़ रहे हैं। अबेक्कस म्यूचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वैभव चुघ ने कहा कि फ्लेक्सी कैप योजनाएं वर्तमान बाजार परिस्थितियों में आवश्यक लचीलापन प्रदान करती हैं, जो निवेशकों को बदलते आर्थिक माहौल में बेहतर निर्णय लेने में मदद करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मिड और स्मॉल कैप योजनाओं में लगातार निवेश प्रवाह यह दर्शाता है कि निवेशक अधिक रिटर्न के अवसरों की तलाश में हैं। इसके विपरीत, लार्ज कैप और कर-बचत योजनाओं में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि यह संकेत देती है कि निवेशक अब अधिक प्रदर्शन आधारित और लचीली निवेश रणनीतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।



