वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच बुधवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों और कारोबारियों की नजर इस सप्ताह संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की अंतिम पुष्टि पर टिकी हुई है। इस कारण सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में कीमती धातुओं की मांग कमजोर पड़ती दिखाई दी। देश के घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त वायदा वाला सोना कारोबार के दौरान लगभग सुबह 11:30 बजे तक 0.51 प्रतिशत या ₹.790 गिरकर ₹.1,52,301 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह ₹.1,52,501 पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो पिछले बंद स्तर की तुलना में 0.39 प्रतिशत या ₹.590 की कमजोरी दर्शाता है।
कारोबार के दौरान सोने ने ₹.1,53,179 का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद भाव ₹.1,53,091 की तुलना में 0.05 प्रतिशत या ₹.88 अधिक था। इससे साफ है कि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है और निवेशक किसी बड़े संकेत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं जुलाई वायदा वाली चांदी ₹.2,49,910 पर कारोबार करती दिखाई दी, जो ₹.195 या 0.08 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। सत्र के दौरान चांदी ₹.2,48,777 के निचले स्तर तक फिसली, जहां इसमें 0.53 प्रतिशत या ₹.1,328 की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर इसने ₹.2,51,498 का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद भाव से 0.55 प्रतिशत या ₹.1,393 अधिक था।
कारोबार की शुरुआत में सोना ₹.1,52,800 और चांदी ₹.2,50,557 पर खुले थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। कॉमेक्स में चांदी 0.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना 0.13 प्रतिशत गिरकर 4,348.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एमसीएक्स पर सोना फिलहाल ₹.1,52,000 से ₹.1,52,500 के महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र के आसपास बना हुआ है। यदि कीमतें लगातार ₹.1,53,500 से ₹.1,54,000 के ऊपर टिकती हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है और सोना ₹.1,55,000 से ₹.1,55,500 तक पहुंच सकता है। हालांकि यदि कीमतें ₹.1,52,000 से नीचे फिसलती हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सोना ₹.1,51,000 से होते हुए ₹.1,50,000 तक जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी फिलहाल ₹.2,49,000 से ₹.2,50,000 के दायरे में कारोबार कर रही है और बाजार की अस्थिरता के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। यदि चांदी ₹.2,51,000 से ₹.2,52,000 के प्रतिरोध क्षेत्र को पार कर लगातार ऊपर बनी रहती है तो इसमें तेजी बढ़ सकती है और कीमतें ₹.2,54,000 से ₹.2,55,000 तक पहुंच सकती हैं। दूसरी ओर ₹.2,48,000 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और कीमतें ₹.2,46,500 से ₹.2,45,500 तक गिर सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार कीमती धातुओं में कमजोरी की बड़ी वजह भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट कच्चा तेल 79 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

