भारत का बढ़ता Russian Oil Import
भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल (Russian Crude) के बढ़ते आयात के पीछे केवल Discount Price मुख्य वजह नहीं है, बल्कि West Asia में Supply Disruption इसका बड़ा कारण बनकर सामने आया है। Axis Bank Economic Research की एक Report के अनुसार, US-Iran War शुरू होने के बाद भारत ने औसतन हर महीने करीब 60 Million Barrels Russian Crude का आयात किया है।
298 Million Barrels पहुंचा आयात
Report के मुताबिक, US-Iran War शुरू होने के बाद से भारत ने कुल 298 Million Barrels Russian Crude खरीदा है। वहीं FY23-26 के दौरान भारत का औसत Russian Oil Import करीब 46 Million Barrels प्रति माह रहा था। Report में बताया गया कि March 2026 के बाद अतिरिक्त 1 Million Barrel Per Day आयात को केवल कीमतों में अंतर के आधार पर नहीं समझाया जा सकता।
Discount का असर सीमित
March 2022 से June 2023 के बीच भारत के Imported Crude Basket में रूस की हिस्सेदारी 0 प्रतिशत से बढ़कर करीब 30 प्रतिशत हो गई थी। शुरुआती दौर में इसका कारण Discount माना गया था, लेकिन हालिया स्थिति में कीमतों का अंतर इसकी पूरी वजह नहीं है।
Report में कहा गया कि 2023 के बाद से Russian Crude और West Asia Crude के बीच औसत Discount लगभग 3-5 Dollar प्रति Barrel स्थिर रहा है। इसके बावजूद भारत का आयात बढ़ा, जबकि कई बार Russian Oil पर 7 Dollar प्रति Barrel तक Premium भी देखा गया।
Trade Negotiations और Tariff Impact
Axis Bank Economic Research Report के अनुसार, बहुत अधिक Tariff लगाने की धमकी Trade Negotiations में ज्यादा प्रभावी साबित होती है, जबकि वास्तविक Tariff लागू होने से Energy Prices पर असर पड़ सकता है। Report में कहा गया कि अमेरिका में बढ़ती Energy Prices Retail Inflation को सीधे प्रभावित कर सकती हैं।
भारत के Export में बढ़ी रफ्तार
वहीं भारत के Export में भी मजबूती देखने को मिली है। चालू Fiscal Year में अब तक भारत के Exports में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। Electronics, Auto & Parts, Metals और Refined Petroleum Products जैसे सेक्टर ने इसमें अहम योगदान दिया है। इसके अलावा US Market में भारत के Exports में भी सुधार दर्ज किया गया है।

