पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। घरेलू और वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा, जिसके चलते सोना और चांदी दोनों की कीमतों में 2प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता और सुरक्षित निवेश की मांग में कमी का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया।
Multi Commodity Exchange (MCX) पर अगस्त वायदा सोना कारोबार के दौरान 1प्रतिशत तक गिरकर ₹.1,46,444 के निचले स्तर पर पहुंच गया। दोपहर करीब 12बजे सोना ₹.157 की गिरावट के साथ ₹.1,47,860 पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले कारोबार के दौरान सोना ₹.1,48,089 के उच्च स्तर तक भी पहुंचा था। वहीं जुलाई वायदा चांदी ₹.1,005 की गिरावट के साथ ₹.2,34,500 पर कारोबार करती दिखाई दी। कारोबार के दौरान चांदी ₹.2,30,493 के निचले स्तर तक फिसल गई, जो सत्र के दौरान 2.12प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। दिन के दौरान चांदी का उच्च स्तर ₹.2,35,402 रहा।
कारोबार की शुरुआत में MCX पर सोना ₹.1,46,518 और चांदी ₹.2,31,671 पर खुली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद दोनों धातुओं में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। COMEX चांदी 1.29प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 63.90डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। वहीं COMEX सोना 0.68प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,105.30डॉलर प्रति औंस पर बना रहा।
जिंस बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम पर निवेशकों की लगातार नजर बनी हुई है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। हालांकि अब कूटनीतिक वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावनाओं ने सुरक्षित निवेश की मांग को कुछ हद तक कम किया है, जिसका असर सोना और चांदी की कीमतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना भी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक कारक साबित हो रही है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों की आकर्षण क्षमता घट जाती है, जिससे उनकी मांग प्रभावित होती है।
इसके अलावा निवेशक ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ते महंगाई संबंधी दबावों का भी आकलन कर रहे हैं। बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की आगामी नीतियों पर बनी हुई है, क्योंकि महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े फैसले कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। Brent Crude 2प्रतिशत से अधिक बढ़कर 95डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI Crude 4प्रतिशत की तेजी के साथ 93.64डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में वित्तीय बाजारों और कीमती धातुओं पर देखने को मिल सकता है।

