Thursday, July 23, 2026 |
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IIT Roorkee से ब्रेन रिकोडिंग तक: गजेंद्र सिंह ने एआई आधारित लर्निंग, उद्यमिता और शिक्षा के भविष्य के निर्माण पर रखे विचार

by Business Remedies
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जयपुर | चारू भाटिया | उद्यमिता की राह कभी भी सीधी नहीं होती और Gajendra Singh की कहानी इसे बेहतर तरीके से दर्शाती है। IIT Roorkee के पूर्व छात्र और Brain Recoding के संस्थापक Gajendra Singh ने सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से आने के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प, प्रयोगों और तकनीक के माध्यम से वास्तविक शैक्षणिक चुनौतियों को हल करने के विश्वास के साथ अपनी यात्रा तय की है। IIT Roorkee में छात्र रहते हुए उद्यम शुरू करने से लेकर भारत के उभरते AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म बनाने तक, उन्होंने कई बड़ी सफलताओं के साथ-साथ कठिन चुनौतियों का भी सामना किया है। आज Brain Recoding के माध्यम से Singh का उद्देश्य Neuroscience, Cognitive Psychology और Artificial Intelligence को जोड़कर छात्रों के सीखने के तरीके को बदलना है। इस बातचीत में उन्होंने अपनी उद्यमशीलता यात्रा, Brain Recoding के पीछे की प्रेरणा, कंपनी के नवाचार उत्पादों, त्रिपुरा सरकार के साथ हालिया सहयोग, शिक्षा में AI की भूमिका और ऐसे भविष्य के निर्माण के अपने दृष्टिकोण के बारे में बताया, जहां तकनीक सीखने के परिणामों को बेहतर बनाते हुए छात्रों को भविष्य के करियर के लिए तैयार कर सके।

प्रश्न: आप Brain Recoding के संस्थापक हैं। आपकी उद्यमशीलता यात्रा अब तक कैसी रही है?

उत्तर: मेरी यात्रा सीखने, चुनौतियों और लगातार प्रयोगों से भरी रही है। मुझे भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक, IIT Roorkee में प्रवेश प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के कारण IIT तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। मैं अपने बैच का टॉप रैंक वाला छात्र था और मैंने CAT All India Rank 141 हासिल की थी। वहां पढ़ाई के दौरान मुझे महसूस हुआ कि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों प्रतिभाशाली छात्र इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण तैयारी सामग्री तक पहुंच नहीं बना पाते हैं। इसी सोच के साथ मैंने लगभग 110 IIT छात्रों को साथ जोड़ा और इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री तैयार करने की पहल शुरू की। हमने Branch के अनुसार शैक्षणिक सामग्री तैयार की और इसे केवल 500 रुपये की किफायती कीमत पर उपलब्ध कराया, ताकि योग्य छात्र इसका लाभ उठा सकें। हालांकि इस पहल को काफी सराहना मिली, लेकिन हमारे पास तकनीकी और व्यावसायिक अनुभव की कमी के कारण लगभग डेढ़ साल बाद इसे बंद करना पड़ा।

हालांकि, मेरा उद्यमशीलता का जज्बा बरकरार रहा। अपने एक शिक्षक के साथ मिलकर मैंने Indian Business Organization of Cards नामक एक Private Limited कंपनी की सह-स्थापना की, जिसने Discount Card उपलब्ध कराने के लिए Brands के साथ साझेदारी की। इस अवधारणा ने व्यवसायों को ग्राहकों से जुड़ाव और बिक्री बढ़ाने में मदद की, लेकिन अंततः यह उद्यम परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करने लगा क्योंकि कई बड़े Brands को अपनी Corporate Headquarters से साझेदारी जारी रखने की मंजूरी नहीं मिली। उस समय मेरे सामने एक कठिन निर्णय था कि मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूं या पूरी तरह से उद्यमिता को समर्पित कर दूं। मैंने दूसरा विकल्प चुना और अपने Vision को आगे बढ़ाने के लिए IIT छोड़ दिया। मेरा अगला उद्यम, Project Tryas, Digital Discount Card Distribution पर केंद्रित था। इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। Play Store पर लॉन्च होने के कुछ घंटों के भीतर ही यह अपनी श्रेणी में दूसरा सबसे अधिक Download किए जाने वाले Application में शामिल हो गया और Server Traffic इतना अधिक हो गया कि उपलब्ध Infrastructure की क्षमता से भी आगे निकल गया। शुरुआती मजबूत प्रतिक्रिया के बावजूद यह व्यवसाय लंबे समय तक टिक नहीं पाया और इसे बंद करना पड़ा। बाद में मैंने राजस्थान में Edukit के साथ काम किया, जहां मुझे एक छोटी Equity हिस्सेदारी की पेशकश की गई।

वहां अपने कार्यकाल के दौरान मैंने आक्रामक रूप से बिक्री पर ध्यान देने के बजाय शैक्षणिक उत्पाद को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। मेरा दृढ़ विश्वास था कि तकनीक अकेले प्रभाव पैदा नहीं कर सकती, जब तक कि वह उपयोगकर्ताओं को वास्तविक मूल्य प्रदान न करे। चूंकि मेरा Vision कंपनी की दिशा से अलग था, इसलिए मैंने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इसके बाद मैंने School Shiksha Parivar के साथ काम किया, जहां मुझे 2,000 से अधिक स्कूलों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला। इन अनुभवों ने मुझे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को समझने में मदद की। धीरे-धीरे यह स्पष्ट हुआ कि मैं ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहता हूं, जो तकनीक को Neuroscience, Psychology और व्यावहारिक सीखने के परिणामों के साथ जोड़े। इसी सोच ने अंततः Brain Recoding की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

प्रश्न: Brain Recoding क्या है और कंपनी कौन से समाधान उपलब्ध कराती है?

उत्तर: Brain Recoding एक Education Technology Platform है, जो मानव मस्तिष्क के काम करने के तरीके को समझकर छात्रों के सीखने के तरीके को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। किसी भी उत्पाद को विकसित करने से पहले हमने भारत के प्रसिद्ध Cognitive Psychologist Dr. Nagpal Singh के साथ मिलकर सीखने के पैटर्न, याददाश्त, एकाग्रता और Cognitive Development को समझने के लिए व्यापक रूप से काम किया।

अभिभावक अक्सर अपने बच्चों की एकाग्रता की कमी, ध्यान केंद्रित न कर पाने या जानकारी याद रखने में परेशानी को लेकर चिंतित रहते हैं। ये चिंताएं शिक्षा से जुड़े आंकड़ों में भी दिखाई देती हैं। बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा पूरी करने से पहले ही अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं। हमारा मानना है कि मानसिकता और Cognitive क्षमताएं शैक्षणिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्षों के शोध के आधार पर हमने कई तकनीक आधारित Learning Solutions विकसित किए हैं। हमारी प्रमुख पेशकशों में से एक Mind Gyme है, जिसे Mid-Brain Activation की अवधारणा के आधार पर तैयार किया गया है। हमारे आंतरिक मूल्यांकन में हमने उत्साहजनक परिणाम देखे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने कुछ विशेष Cognitive अभ्यासों में उल्लेखनीय सुधार दिखाया। एक अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद NeuroHabits है, जिसे सीखने के व्यवहार से संबंधित हजारों अंतरराष्ट्रीय Research Papers के विश्लेषण के बाद विकसित किया गया है। यह एकाग्रता बढ़ाने, ध्यान भटकाने वाली चीजों को कम करने और छात्रों में बेहतर सीखने की आदतें विकसित करने पर केंद्रित है। हमने Rapid Recall System भी पेश किया है, जो छात्रों को रटने के बजाय Visualization, Storytelling और व्यवस्थित Memory Techniques के माध्यम से शैक्षणिक सामग्री याद रखने में सक्षम बनाता है। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक अध्याय के लिए नए Memory Framework तैयार करने पर काम किया और बाद में धीरे-धीरे इस प्रक्रिया में AI को शामिल किया। हमारा उद्देश्य सीखने को रोचक, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से व्यवस्थित बनाना है।

प्रश्न: Brain Recoding ने हाल ही में त्रिपुरा सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी में क्या शामिल है?

उत्तर: त्रिपुरा सरकार के साथ हमारा सहयोग उच्च शिक्षा का एक नया मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है, जो छात्रों को भविष्य की तकनीक आधारित नौकरियों के लिए तैयार करता है। इसके प्रमुख Focus Areas में से एक AI Business Automation के क्षेत्र में अवसर तैयार करना है, जहां छात्र Artificial Intelligence का उपयोग करके वास्तविक व्यावसायिक चुनौतियों का समाधान करने में विशेषज्ञता हासिल कर सकें। इस कार्यक्रम को कई चरणों में तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य छात्रों को केवल पारंपरिक रोजगार के लिए तैयार करने के बजाय उन्हें सृजनकर्ता, नवोन्मेषक और उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करना है। हमारा मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्थाएं उन लोगों को अधिक महत्व देंगी जो बौद्धिक मूल्य का सृजन करेंगे और शिक्षा को भी उसी दिशा में विकसित होना होगा।

प्रश्न: भारत के शिक्षा क्षेत्र में वर्तमान रुझानों का आप किस प्रकार आकलन करते हैं?

उत्तर: हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमियों में से एक यह है कि छात्रों को कौशल तो सिखाए जाते हैं, लेकिन उन कौशलों को सार्थक अवसरों या टिकाऊ करियर में कैसे बदला जाए, यह नहीं सिखाया जाता। कौशल विकास और उससे आय अर्जित करना दो पूरी तरह अलग पहलू हैं और दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। मानसिकता का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि छात्रों में आत्मविश्वास, अनुशासन, अनुकूलन क्षमता और उद्यमशील सोच की कमी हो, तो केवल तकनीकी ज्ञान सफलता सुनिश्चित नहीं कर सकता। National Education Policy (NEP) 2020 के बारे में मेरा मानना है कि यह शिक्षा में बदलाव लाने के लिए एक उत्कृष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसमें आधुनिक शिक्षा के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए अधिक मजबूत संस्थागत ढांचे, व्यावहारिक कार्यान्वयन रणनीतियों और निरंतर निगरानी की आवश्यकता है, ताकि इसके अपेक्षित परिणाम प्रभावी रूप से प्राप्त किए जा सकें।

प्रश्न: शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए AI Model को प्रभावी ढंग से कैसे प्रशिक्षित किया जा सकता है?

उत्तर: इसकी कुंजी मजबूत अवधारणा निर्माण में है। AI केवल जानकारी उत्पन्न करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे शैक्षणिक मूल्य प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। Brain Recoding में हम Education with AI नामक एक पहल पर काम कर रहे हैं, जहां Artificial Intelligence संरचित शिक्षण सामग्री विकसित करने में सहायता करता है।

उदाहरण के लिए, पहले प्रत्येक अध्याय के लिए Memory Techniques को मैन्युअली तैयार करना पड़ता था, लेकिन अब AI पहले से निर्धारित शैक्षणिक ढांचों के आधार पर रचनात्मक Recall Techniques तैयार कर सकता है। इससे हम गुणवत्ता युक्त शैक्षणिक सामग्री को अधिक तेजी से और समान गुणवत्ता बनाए रखते हुए तैयार कर सकते हैं। AI का उद्देश्य शिक्षकों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उनकी भूमिका को मजबूत करना और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना होना चाहिए।

प्रश्न: शिक्षा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने में सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर: सहयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से नवाचार आधारित शैक्षणिक मॉडल समाज के अधिक व्यापक वर्गों तक पहुंच सकते हैं। त्रिपुरा सरकार के साथ हमारी साझेदारी इसका एक उदाहरण है कि इस प्रकार की पहल राज्य स्तर पर छात्रों के लिए किस प्रकार लाभकारी हो सकती है। हम Madhya Pradesh सहित अन्य राज्य सरकारों के साथ भी इसी प्रकार के सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसी साझेदारियां विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों को लागू करना संभव बनाती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिल सके।

प्रश्न: Artificial Intelligence को अपनाने को लेकर आपकी क्या चिंताएं हैं?

उत्तर: सबसे बड़ी चुनौती जागरूकता है। हालांकि AI आज व्यापक रूप से चर्चा का विषय बन चुका है, लेकिन अभी भी बहुत से लोग इसके व्यावहारिक उपयोग और दीर्घकालिक महत्व को पूरी तरह नहीं समझते हैं। मेरा मानना है कि आने वाले वर्षों में Artificial Intelligence आधारित व्यक्तिगत शिक्षण मुख्यधारा की वास्तविकता बन जाएगा। हालांकि, छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों को इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने के लिए उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। उदाहरण के लिए, Prompt Engineering एक महत्वपूर्ण कौशल के रूप में उभर रही है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हमने Artificial Intelligence Genius Foundation नामक एक विशेष मॉड्यूल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य लोगों को AI प्रणालियों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करना सिखाना है।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि AI आधारित शैक्षणिक उत्पाद अधिक किफायती होते जा रहे हैं?

उत्तर: बिल्कुल। तकनीक लगातार अधिक सुलभ होती जा रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहले की तुलना में अधिक किफायती बन रही है। हमारा उद्देश्य हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि उन्नत शिक्षण उपकरण सामान्य छात्रों की पहुंच के भीतर रहें। उदाहरण के लिए, हम अपने Mobile Application के माध्यम से कुछ शिक्षण कार्यक्रम आजीवन Access के साथ केवल 6000 रुपये की किफायती कीमत पर उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न: अंत में, आप उन युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे जो तकनीक और उद्यमिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं?

उत्तर: सबसे पहली आवश्यकता है कि आपके पास अपने Vision को लेकर पूरी स्पष्टता हो। किसी भी यात्रा की शुरुआत करने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं और क्यों हासिल करना चाहते हैं। जब आपका उद्देश्य स्पष्ट होता है, तो आपका हर निर्णय अधिक केंद्रित हो जाता है। इसके साथ ही सही मानसिकता का विकास भी बेहद महत्वपूर्ण है। सफलता बहुत कम मामलों में तुरंत मिलती है और असफलताएं हर उद्यमशील यात्रा का हिस्सा होती हैं। तकनीक के क्षेत्र में आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए दृढ़ता, अनुशासन और लगातार सीखते रहने की आदत अत्यंत आवश्यक गुण हैं। मैं युवा उद्यमियों को यह भी प्रोत्साहित करूंगा कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों को रखें, जो उन्हें प्रेरित करें और आगे बढ़ने की चुनौती दें। जिन लोगों के साथ आप रहते हैं, उनका आपके विचारों और महत्वाकांक्षाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये बातें सुनने में भले ही सरल लगें, लेकिन यदि इन्हें लगातार अपनाया जाए, तो यही दीर्घकालिक सफलता की मजबूत नींव बनती हैं।



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