Thursday, July 23, 2026 |
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भारत में Ethanol मिश्रित पेट्रोल बना बहस का मुद्दा

by Business Remedies
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इस वर्ष एक अप्रैल से भारत में ई20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य कर दिया गया है, तब से यह बहस का मुद्दा भी बनता जा रहा है। मुद्दा इस बात का है कि वाहनों में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथेनॉल होगा तो गाडिय़ों के माइलेज और पुराने वाहनों पर इसका असर पड़ेगा। इसके फायदे ज्यादा तो नुकसान बहुत कम नजर आ रहे हैं। इसके नुकसान पर बहस करने वाले इस बात को नहीं सोच रहे हैं कि इससे आने वाले समय में क्रूड ऑयल के आयात में बचत होगी यानि विदेशी मुद्रा और ऊर्जा की सुरक्षा हो सकेगी। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का उद्देश्य केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत भी है। इसका असर सरकार, किसानों, तेल कंपनियों और उपभोक्ताओं पर अलग-अलग पड़ता है। जहां जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल भारत आयात करता है। यदि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है, तो पेट्रोल की खपत घटती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। तेल आयात कम होने से हर साल हजारों करोड़ रुपए की बचत हो सकेगी। वहीं किसानों को अतिरिक्त आय होगी क्योंकि एथेनॉल मुख्यत: गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। इससे किसानों को अपनी उपज का एक अतिरिक्त बाजार मिल सकेगा। इसके अलावा एथेनॉल में ऑक्सीजन अधिक होती है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ अन्य प्रदूषकों का उत्सर्जन कम हो सकता है। एथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों और डिस्टिलरी उद्योग में रोजगार और निवेश भी बढ़ेगा। जहां इसकी नुकसान की बात करें तो एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है। ई20 ईंधन पर सामान्यत: लगभग 3-7 फीसदी तक माइलेज कम हो सकता है, हालांकि वास्तविक अंतर वाहन और ड्राइविंग पर निर्भर करता है। जो कि ना के बराबर ही है। इसके अलावा पुराने मॉडल के वाहनों में रबर सील, पाइप और कुछ धातु के हिस्से एथेनॉल से जल्दी घिस सकते हैं। नए ई20 अनुकूल वाहनों में यह समस्या काफी हद तक कम होती है। सरकार का भी तर्क है कि नुकसान से ज्यादा फायदा ज्यादा है।



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