Thursday, September 3, 2026 |
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जीडीपी बढऩे का फायदा तभी जब नौकरियां और खेती की आय बढ़े

by Business Remedies
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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास दर की रफ्तार बनाए रखी है। वित्त वर्ष, 2026-27 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। वहीं नॉमिनल जीडीपी में 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह हरेक भारतवासी के लिए अच्छी खबर है, लेकिन जीडीपी की वृद्धि का लाभ रोजगार, वास्तविक आय और उत्पादकता के रूप में लोगों तक पहुंचना भी जरूरी है। सिर्फ जीडीपी बढऩे से हर परिवार अपने आप समृद्ध नहीं हो जाता। आम आदमी को फायदा तभी है जब नौकरियां बढ़ें, खेती की आय बढ़े और महंगाई आरबीआई के 4 फीसदी के टारगेट के पास रहे। अभी सरकार उसी कोशिश में जुटी है कि जीएसटी कम करके त्योहारों में खपत बढ़े और बुनियादी ढांचे पर पैसा लगाया जाए। लोगों को जीडीपी बढऩे का फायदा तभी होगा जब कंपनियां उत्पादन और निवेश बढ़ाएं, इससे नए कारखाने, सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण और तकनीकी नौकरियां पैदा होंगी। वहीं उत्पादकता बढऩे पर कंपनियों के पास बेहतर वेतन देने की क्षमता बढ़ेगी। ज्यादा आर्थिक गतिविधि से जीएसटी, आयकर, कॉरपोरेट टैक्स आदि का संग्रह बढ़ेगा। इससे सडक़, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और पानी जैसी सुविधाओं पर खर्च बढ़ाना आसान हो जाएगा। ज्यादा लोगों की आय और खपत का अर्थ है दुकानों, परिवहन, होटल, निर्माण और स्थानीय सेवाओं की मांग बढऩा। जहां आबादी, महंगाई और आय-असमानता को ध्यान में रखने के बाद व्यक्ति की वास्तविक आय बहुत कम बढ़ती है, तो नागरिक को उसका फायदा सीमित महसूस होगा। अभी तेल की कीमतें तथा भू-राजनीतिक जोखिम पर विशेष चिंता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात कर रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल महंगा होने पर परिवहन, बिजली, उर्वरक, प्लास्टिक और अनेक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। अत: भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था बनना नहीं है, बल्कि उच्च प्रति व्यक्ति आय वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है।



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