भारत में अबकी बार अल नीनो के कारण मानसून की बारिश औसत से भी कम होने से किसानों को चिंता सताने लगी है। मानसून की असमान बारिश ने खेती से लेकर बांधों में पानी के स्तर को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। बाजार में अनाज और सब्जियों की आवक घटने से खाद्य महंगाई दर बढक़र 5 फीसदी या उससे अधिक तक पहुंच सकती है और पानी की कमी से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। आने वाले गर्मी के मौसम में बांधों के नहीं भरने से पानी किल्लत भी आ सकती है। कई शहरी व ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों की बुवाई देरी से होने के कारण उत्पादन कम होने की संभावना बनी हुई है। वहीं कई इलाकों में अधिक बारिश से फसलों को नुकसान भी हुआ है। ऐसे फसल उत्पादन पर असर पडऩे की संभावना है। खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी। जहां सितंबर का महीना फसल पकने के लिए महत्वपूर्ण होता है। अगर इस दौरान बारिश नहीं हुई तो मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों की फसल कमजोर रहने की उम्मीद है। वहीं गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा गेहूं और रेपसीड जैसी सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों के लिए जरूरी मिट्टी की नमी भी कम हो सकती है। ऐसे में सरकार को अभी से निर्यात पर बंदिशें लगाकर देश में ही डिमांड के अनुसार दालों व अन्य फसलों की उचित दामों में आपूर्ति करने की पहल करनी चाहिए। इससे किसानों को भी उचित दाम मिल सके और आमजन पर महंगाई की मार सीधे नहीं पड़ सके।

