Monday, July 13, 2026 |
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औद्योगिक इकाईयों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना आवश्यक

by Business Remedies
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लगातार ग्लोबल वार्मिंग संकट से जूझती दुनिया में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर नियंत्रण की दिशा में भारत सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जतायी है। केंद्र सरकार के गत सप्ताह की शुरुआत में अधिसूचित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य नियम, भारत में औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कहा जा रहा है। इन नियमों ने कार्बन-प्रधान उद्योगों के लिये देश के पहले कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन न्यूनतम करने के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। ऐसे में, जो उत्पादन इकाईयां अपने निर्धारित लक्ष्य से कम कार्बन का उत्सर्जन करती हैं, वे व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकती हैं। वहीं दूसरी ओर निर्धारित लक्ष्य से अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाली इकाईयों को भारतीय कार्बन बाजार से समतुल्य क्रेडिट खरीदना होगा या फिर जुर्माना देने को बाध्य होना होगा। दरअसल, एल्युमीनियम, सीमेंट, लुगदी एवं कागज आदि क्षेत्रों की 282 औद्योगिक इकाईयों को 2023-24 के आधार रेखा स्तर से अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना आवश्यक है।

यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश है। जिसमें चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है। नि:संदेह, नये नियम, जो उद्योगों को उत्सर्जन कम करने के लिये प्रोत्सहित करते हैं, उनके औद्योगिक प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार ऊर्जा दक्षता योजना पर आधारित हैं। जिसने ऊर्जा-बचत के लक्ष्य निर्धारित किए। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिसे दंड लगाने और समयबद्ध निगरानी व वसूली का काम सौंपा गया है, को कानूनी ढांचे के अनुसार सख्ती से कार्य करने की आवश्यकता है।



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