अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए भारत निरंतर प्रयासरत है। इसी को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम शिगेरू इशिबा के साथ पिछले दिनों बातचीत के दौर चले। टं्रप टैरिफ और चाइना से तनातनी के बीच भारत, जापान से निवेश की पेशकश कर रहा है, ताकि निवेश को मजबूती प्रदान हो सके। इसके लिए वे जापान की यात्रा पर भी गए। बातचीत में जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने भारत में 10 ट्रिलियन येन यानी करीब 6 लाख करोड़ रुपए निवेश करने का प्लान बनाया है। इसका मकसद अगले 10 सालों में भारत-जापान के बिजनेस रिश्तों को मजबूत करना है। अगले दशक के लिए रोडमैप भी तैयार किया गया है। दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने 17 साल बाद पहली बार सुरक्षा सहयोग पर साझा घोषणा भी की है। इसके अलावा जापान का निवेश भारत के लिए मोबिलिटी, पर्यावरण और चिकित्सा जैसे सेक्टर में शामिल हैं। जापानी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत में विस्तार करने में मदद करेगी। इन कंपनियों में भारतीय विशेषज्ञ इंजीनियरों को नौकरी मिलेगी। वहीं भारत के प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-५ मिशन में भारत-जापान साझेदारी की घोषणा की है। इसके जरिए इसरो व जाक्सा चंद्रमा पर एशियाई परचम लहराएंगे। इसके अलावा जापान, भारत के स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा देगा। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी पहले ही तेलंगाना के स्टार्टअप्स को कर्ज दे चुकी है। साथ ही जापान भारत के टैलेंट हायरिंग पर भी ध्यान देगा। टोक्यो में हुई शिखर वार्ता में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए १३ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। जहां सतत विकास की दिशा में दोनों देश टिकाऊ ऊर्जा पहल और बैटरी सप्लाई चेन के लिए साझेदारी की गई है। इसके अलावा विकेंद्रित वेस्ट वाटर मैनेजमेंट पर भी समझौता वार्ता की गई है। दोनों देशों के बीच हुए यह समझौते देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।

