हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाएगा। यह दिन फोटोग्राफी के कला, विज्ञान, इतिहास और प्रभाव को मनाने के लिए समर्पित है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य फोटोग्राफी के महत्व को उजागर करना और दुनिया भर के फोटोग्राफरों को एक साथ लाना है। फोटोग्राफी एक ऐसी कला है जो हमें पलों को हमेशा के लिए स्थिर और संजोकर रखने का मौका देती है। एक ही तस्वीर कई तरह की भावनाओं और संवेदनाओं को जगा सकती है, जिन्हें एक नजर से फिर से जीया जा सकता है। यह दिन फोटोग्राफी की कला के साथ-साथ उससे जुड़ी तकनीक और इतिहास का भी स्मरण करता है। ऐतिहासिक घटनाओं को दर्ज करने और उन्हें एक ऐसी तस्वीर में समेटने में फोटोग्राफी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसे आने वाली पीढिय़ां याद रखेंगी। फोटोग्राफरों की उपलब्धियों का सम्मान करने के साथ-साथ लोग फोटोग्राफी के उन अग्रदूतों को भी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दुनिया भर के लोगों को इस कला को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया है। समय के साथ फोटोग्राफी में काफी प्रगति हुई है। कई लोगों के लिए यह एक शौक से बढक़र एक पूर्ण कॅरियर बन गया है। यह महज एक तकनीक से बढक़र अभिव्यक्ति का एक ऐसा जरिया बन गया है, जो एक ही तस्वीर से हजारों शब्द व्यक्त कर देता है। फोटोग्राफी का इतिहास फ्रांस में 1837 से शुरू हुआ, जब जोसेफ नाइसफोर नीप्स और लुई डागुएरे नाम के दो लोगों ने पहली फोटोग्राफिक प्रक्रिया या डागुएरियोटाइप विकसित की थी। इसके बाद19 जनवरी, 1837 को फ्रांसीसी विज्ञान अकादमी द्वारा इस आविष्कार की आधिकारिक घोषणा की गई। ऐसा माना जाता है कि घोषणा के 10 दिन बाद फ्रांसीसी सरकार ने इस आविष्कार का पेटेंट खरीद लिया था। सरकार ने पेटेंट का कॉपीराइट नहीं लिया और इसे दुनिया को उपहार के रूप में दे दिया। वहीं विलियम हेनरी फॉक्स टैलबोट ने बाद में 1839 में फोटोग्राफी तकनीक को सरल बनाया। उन्होंने कागज पर नमक के निशान लगाकर तस्वीरें लेने का एक नया और ज्यादा अनुकूलनीय तरीका ईजाद किया।

