भारत को ‘मेक इन इंडिया’ का विजन निरंतर रास आ रहा है। इसी का परिणाम है कि हम निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। भारत का रक्षा क्षेत्र ने तो निर्यात में कायाकल्प ही कर दिया है। वहीं देश का निर्यात पिछले माह सालाना आधार पर 7.29 प्रतिशत बढक़र 37.24 अरब डॉलर हो गया, जबकि व्यापार घाटा 27.35 अरब डॉलर रहा। पिछले दिनों वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले साल के समान महीने में देश का निर्यात 34.71 अरब डॉलर रहा था। पिछले महीने देश का निर्यात बढऩे के साथ आयात में भी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान आयात 8.6 प्रतिशत बढक़र 64.59 अरब डॉलर हो गया। जहां रक्षा क्षेत्र की तकनीक, बाजार और बिजनेस को सबसे ज्यादा जटिल माना जाता है। 21वीं सदी में हमारा देश रक्षा सेक्टर में बिल्कुल नई राह पर चल रहा है। भारत आज दुनिया के 75 देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। रक्षा निर्यात की बात करें तो 2016-17 में यह 1522 करोड़ रुपए था, जो 2023-24 में बढक़र 21,083 करोड़ रुपए हो गया है। यानी 7 साल में देश का रक्षा निर्यात करीब 13 गुना बढ़ा है, जो डिफेंस सेक्टर में भारत के मजबूत कदमों की ओर साफ संकेत करता है। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में भारत, दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरर देशों में शामिल होने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। इस दिशा में निजी क्षेत्र और निजी निवेशकों भी आगे आने को तत्पर हैं। इसके अलावा अब कई सेक्टर में एफडीआई को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी मिली है। उद्योगों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए उसकी वैलिडिटी बढ़ाई गई है। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को भी बढ़ाया गया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को भी होने वाला है।आने वाले समय में मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के बल पर ही भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में एक बनेगा।

