नई मसौदा दूरसंचार नीति जो 2018 की राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति के सात साल के बाद आ रही है, उसके लक्ष्य और उद्देश्य महत्वाकांक्षी हैं। परंतु उसके सामने असल क्रियान्वयन की रहेगी। वर्ष 2018 की नीति और उसके पहले की नीतियों के समक्ष भी यही चुनौती थी। मसौदा राष्ट्रीय दूरसंचार नीति-2025 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 4जी, 5जी और ब्रॉडबैंड कवरेज लक्ष्यों को तय करने के अलावा रोजगार निर्माण को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया है। हालांकि यह निकट भविष्य में हासिल हो सकने वाले लक्ष्य सामने रखने में नाकाम रहा है।
इस नीति के तहत लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2030 का वर्ष तय किया गया है, जो अभी पांच साल दूर है। तकनीक दूरसंचार की रीढ़ है और वह बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसे में इस नीतिगत दस्तावेज के लिए अल्पावधि के लक्ष्य तय करना अधिक महत्वपूर्ण है। जब अंशधारक अगले तीन सप्ताह के दौरान मसौदा नीति पर अपने विचार रखेंगे तो दूरसंचार क्षेत्र की कुछ हकीकतें उजागर होंगी। ऐसे में नीति निर्माताओं को ऐसे लक्ष्य तय करने में मदद मिलेगी जो आकांक्षाओं और व्यवहार्यता के मिश्रण वाले हों।
यह मसौदा नीति दूरसंचार क्षेत्र में सालाना निवेश को दोगुना करके 1 लाख करोड़ रुपये करने तथा इस उद्योग में 10 लाख रोजगार तैयार करने की बात करती है। साथ ही, 10 लाख अन्य लोगों को नए सिरे से कौशल संपन्न बनाने, 90 फीसदी आबादी को 5जी के कवरेज में लाने और वर्ष 2030 तक 10 करोड़ परिवारों को फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड के दायरे में लाने का लक्ष्य शामिल है। इसमें ग्रामीण इलाकों में फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके साथ ही दूरदराज तक संपर्क के लिए छोटे इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को मदद पहुंचाने की बात भी शामिल है। घरेलू दूरंसचार उपकरण विनिर्माताओं को प्रोत्साहन और देश के दूरसंचार शोध एवं विकास व्यय को पांच साल में दोगुना करना भी प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं।

