Friday, July 10, 2026 |
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खराब लाइफस्टाइल हार्मोनल असंतुलन की बड़ी वजह : डॉ. यशस्वी पाठक

by Business Remedies
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जयपुर | चारु भाटिया | हर चिकित्सा पेशेवर के पीछे दृढ़ संकल्प, जिज्ञासा और उद्देश्य की एक कहानी होती है। इस बातचीत में, JNU Hospital, Jaipur की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट Dr. Yashasvi Pathak अपने उस सफर पर प्रकाश डालती हैं, जो बचपन की जिज्ञासा से शुरू होकर हार्मोनल स्वास्थ्य और मरीजों की देखभाल के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता में बदल गया। अपेक्षाओं के विपरीत जाकर जीवविज्ञान चुनने से लेकर देशभर में प्रशिक्षण लेने और अक्सर अनदेखी की जाने वाली इस विशेषज्ञता को अपनाने तक, Dr. Yashasvi अपने अनुभव, चुनौतियां और आकांक्षाएं साझा करती हैं और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एंडोक्रिनोलॉजी के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालती हैं।

प्रश्न: आप JNU Hospital में एक सफल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं। अपने सफर और प्रेरणा के बारे में बताइए?
उत्तर: मेरी सबसे शुरुआती यादों से ही डॉक्टर बनने की इच्छा मेरे मन में गहराई से बसी हुई थी। एक गैर-चिकित्सकीय परिवार में पली-बढ़ी होने के कारण, चिकित्सा के प्रति मेरा झुकाव आसपास के लोगों को अक्सर आश्चर्यचकित करता था। जहां कई बच्चे अस्पतालों को डर या असहजता से जोड़ते हैं, वहीं मुझे डॉक्टरों के प्रति आकर्षण था।
दिलचस्प बात यह है कि स्कूल के दिनों में मैं गणित में बेहद अच्छी थी, जबकि जीवविज्ञान शुरू में मेरे लिए कठिन विषय था। मेरे पिता, जो एक इंजीनियर हैं, स्वाभाविक रूप से चाहते थे कि मैं भी उसी राह पर चलूं, खासकर क्योंकि मेरी बहन पहले ही इंजीनियरिंग कर चुकी थी। हालांकि, संख्याओं में मेरी सहजता के बावजूद, मेरा मन पूरी तरह से चिकित्सा की ओर था। मैंने जानबूझकर जीवविज्ञान को चुना, भले ही इसमें मुझे अधिक मेहनत और धैर्य लगाना पड़ा। मेरे माता-पिता और मेरी बहन ने इस पूरे सफर में मेरा हमेशा साथ दिया। मैं सच में उनके बिना यह हासिल नहीं कर पाती। मेरे पति, Dr. Lekhraj Chaudhary, इस यात्रा में मेरे लिए एक मजबूत सहारा रहे हैं और आज भी लगातार समर्थन देते हैं।
मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं अपने परिवार की पहली डॉक्टर हूं। मेरी शैक्षणिक यात्रा भौगोलिक रूप से विविध और बौद्धिक रूप से समृद्ध रही है। मैंने अपनी अंडरग्रेजुएट मेडिकल पढ़ाई Mangalore में पूरी की, जहां मुझे विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक वातावरण मिला। इसके बाद मैंने Prayagraj में पोस्टग्रेजुएशन किया, जहां एंडोक्रिनोलॉजी में मेरी रुचि और मजबूत हुई। मैंने एंडोक्रिनोलॉजी में सुपर-स्पेशलाइजेशन (DM) Kolkata से पूरा किया, जहां कठोर प्रशिक्षण और मूल्यवान क्लिनिकल अनुभव मिला। वर्ष 2022 में मैंने Jaipur स्थित JNU Hospital में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और Assistant Professor के रूप में जॉइन किया। तब से मैं मरीजों की देखभाल, अकादमिक शिक्षण और क्लिनिकल रिसर्च में समर्पित हूं।

प्रश्न: एंडोक्रिनोलॉजी के क्षेत्र में क्या-क्या शामिल होता है?
उत्तर: एंडोक्रिनोलॉजी चिकित्सा की सबसे रोचक लेकिन कम पहचानी जाने वाली शाखाओं में से एक है। इसका मुख्य आधार हार्मोन हैं, जो शरीर के केमिकल मैसेंजर होते हैं और लगभग हर शारीरिक प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। जब ये हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तो इसके प्रभाव व्यापक और बहुआयामी हो सकते हैं, जो एक साथ कई अंगों को प्रभावित करते हैं।
इस क्षेत्र में डायबिटीज, थायरॉइड रोग, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम, एड्रिनल विकार, पिट्यूटरी रोग और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस शामिल हैं। समय के साथ, एंडोक्रिनोलॉजी का दायरा बढ़कर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों तक पहुंच गया है, जो आजकल तेजी से बढ़ रही हैं। महिलाओं में यह क्षेत्र PCOS, बांझपन, मासिक धर्म की अनियमितता, मेनोपॉज और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े हार्मोनल असंतुलन को समझने और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ संरचनात्मक पहलुओं पर ध्यान देते हैं, वहीं एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हार्मोनल कारणों पर फोकस करते हैं।
इसके अलावा पुरुषों के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य, किशोरावस्था की समस्याएं और ग्रोथ डिले भी इसमें शामिल हैं।
एंडोक्रिनोलॉजी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हार्मोनल समस्याएं अक्सर चुपचाप विकसित होती हैं। इनके लक्षण वर्षों तक हल्के रह सकते हैं और बाद में गंभीर रूप ले सकते हैं। इसलिए समय पर जांच और रोकथाम बहुत जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में डायबिटीज या थायरॉइड जैसी बीमारियों का इतिहास है।

प्रश्न: एंडोक्रिनोलॉजी में टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका है?
उत्तर: टेक्नोलॉजी ने एंडोक्रिनोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं। पहले ब्लड शुगर मॉनिटरिंग के लिए बार-बार उंगली चुभानी पड़ती थी, लेकिन आज पोर्टेबल ग्लूकोमीटर से मरीज घर पर ही आसानी से अपनी शुगर जांच सकते हैं। इसके अलावा, कंटीन्यूस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) सिस्टम दिन-रात रियल-टाइम डेटा प्रदान करते हैं, जिससे बीमारी को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित बच्चों के लिए इंसुलिन पंप जीवन बदलने वाला उपकरण साबित हुआ है, जो सटीक और निरंतर इंसुलिन डिलीवरी देता है। हालांकि इसकी लागत एक चुनौती है, लेकिन लगातार हो रहे विकास के कारण ये तकनीकें धीरे-धीरे अधिक सुलभ हो रही हैं। डिजिटल हेल्थ ऐप्स और टेलीमेडिसिन ने मरीजों की देखभाल को और अधिक आसान और प्रभावी बना दिया है।

प्रश्न: हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में लाइफस्टाइल की क्या भूमिका है?
उत्तर: लाइफस्टाइल हार्मोनल स्वास्थ्य में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत को अक्सर डायबिटीज कैपिटल कहा जाता है और इसके पीछे जीवनशैली एक बड़ा कारण है। बैठे रहने की आदत, अधिक स्क्रीन टाइम, खराब खान-पान और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन मेटाबोलिक बीमारियों को बढ़ा रहा है। संतुलित आहार बेहद जरूरी है। खासकर प्रोटीन का सेवन 20-25 प्रतिशत होना चाहिए। शाकाहारियों के लिए दही, पनीर, टोफू, सोया और दालें अच्छे स्रोत हैं।
नियमित व्यायाम भी हार्मोनल संतुलन और मेटाबोलिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, पर्यावरणीय कारक जैसे कीटनाशक और भोजन में मौजूद रसायन भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं। कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना भी एक उभरती हुई चिंता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रश्न: हर तीसरी महिला PCOS से जूझ रही है। यह क्या है?
उत्तर: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक मेटाबोलिक और हार्मोनल विकार है, जो आज भी गलतफहमियों और सामाजिक झिझक से घिरा हुआ है। इसमें वरी में कई सिस्ट बन जाते हैं, मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह समस्या बांझपन, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का कारण बन सकती है। इसलिए इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना और खुलकर चर्चा करना बहुत जरूरी है, ताकि समय पर पहचान और इलाज संभव हो सके।

प्रश्न: नींद और तनाव हार्मोनल स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर: नींद और तनाव का आपस में गहरा संबंध है।
खराब नींद से कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। लंबे समय तक रहने वाला तनाव मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है, वजन बढ़ाता है और पहले से मौजूद बीमारियों को और खराब कर सकता है। इसलिए योग, ध्यान, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद बेहद जरूरी हैं।

प्रश्न: हार्मोनल स्वास्थ्य को लेकर कौन-कौन सी गलतफहमियां हैं?
उत्तर: कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं। एक आम मिथक यह है कि टाइप-1 डायबिटीज का इलाज संभव है, जबकि वास्तव में इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है। दूसरी गलतफहमी यह है कि केवल दवाइयों से डायबिटीज खत्म हो सकती है और नियंत्रण में आने के बाद दवाइयां बंद की जा सकती हैं। वास्तविकता यह है कि जीवनशैली में बदलाव से डायबिटीज को रिमिशन में लाया जा सकता है, लेकिन दवाइयां डॉक्टर की सलाह से ही बंद करनी चाहिए।

प्रश्न: आपका भविष्य का विजन क्या है?
उत्तर: मेरा लक्ष्य एंडोक्रिनोलॉजी को मुख्यधारा में लाना और हार्मोनल बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करना है। मैं नियमित जांच, जल्दी पहचान और जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर देती हूं, ताकि लंबी अवधि की जटिलताओं से बचा जा सके।

प्रश्न: एंडोक्रिनोलॉजिस्ट बनने की इच्छा रखने वालों के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर: एंडोक्रिनोलॉजी एक गतिशील और बौद्धिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो मानव जीवन के हर चरण—जन्म, विकास, युवावस्था और बुढ़ापे—को कवर करता है। समर्पण, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ इस क्षेत्र में काम करके आप मरीजों के जीवन में गहरा और स्थायी बदलाव ला सकते हैं।



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