नई दिल्ली,
अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल ने वर्ष 2025 के दौरान भारत में अपने आईफोन के उत्पादन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने भारत में आईफोन निर्माण लगभग 53 प्रतिशत बढ़ाते हुए करीब 5 करोड़ 50 लाख इकाइयों का उत्पादन किया, जबकि इससे एक वर्ष पहले यह संख्या लगभग 3 करोड़ 60 लाख इकाइयों के आसपास थी। रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल अपने प्रमुख उत्पादों के निर्माण का लगभग चौथाई हिस्सा अब भारत में कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन पर लगाए जाने वाले शुल्क से बचना और उत्पादन आधार को विविध बनाना है।
वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी
एप्पल विश्व स्तर पर हर वर्ष लगभग 22 करोड़ से 23 करोड़ आईफोन का निर्माण करती है। इसमें भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार की इस योजना के तहत दी गई प्रोत्साहन राशि ने उत्पादन लागत से जुड़े कई ढांचागत नुकसान को कम करने में मदद की है। चीन की तुलना में भारत में आपूर्ति श्रृंखला और परिवहन व्यवस्था अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, लेकिन सरकारी समर्थन से कंपनियों को राहत मिली है।
आईफोन 17 श्रृंखला का पूरा निर्माण अब भारत में
एप्पल अब अपनी नई आईफोन 17 श्रृंखला के सभी संस्करणों का संयोजन भारत में कर रही है। इसमें प्रो और प्रो मैक्स मॉडल भी शामिल हैं। यह निर्माण फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी समूह, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन जैसी आपूर्तिकर्ता कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अलावा पुराने मॉडल जैसे आईफोन 15 और आईफोन 16 का निर्माण भी भारत में जारी है, जिन्हें घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए तैयार किया जा रहा है। एप्पल भारत में अपने खुदरा कारोबार का भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी के देश में अब छह आधिकारिक स्टोर हो चुके हैं और वह इसी वर्ष भारत में एप्पल पे सेवा शुरू करने की तैयारी भी कर रही है। भारत में एप्पल की बिक्री में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है और यह 9 अरब डॉलर से अधिक के स्तर को पार कर चुकी है, जो कंपनी के लिए भारतीय बाजार के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
सरकारी प्रोत्साहन योजना पर आगे की चर्चा
एप्पल सहित कई बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए सरकार की उत्पादन प्रोत्साहन योजना की पांच वर्ष की अवधि March 2026 में समाप्त होने वाली है। इसके मद्देनजर एप्पल, सैमसंग और अन्य कंपनियां न्यू दिल्ली के साथ नई प्रोत्साहन व्यवस्था पर चर्चा कर रही हैं ताकि निर्यात वृद्धि की गति को बनाए रखा जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने उत्पादन लागत के मामले में चीन और वियतनाम के साथ अंतर को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स संयोजन अभी भी अपेक्षाकृत महंगा है। इसलिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में आईफोन भारत से होने वाला सबसे मूल्यवान निर्यात उत्पाद बन गया। देश की फैक्ट्रियों से लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए गए, जिनमें अधिकांश उपकरण अमेरिका भेजे गए। January से December की अवधि के दौरान स्मार्टफोन भारत की कुल निर्यात श्रेणी में पहली बार शीर्ष स्थान पर रहे। इस दौरान कुल 30.13 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात हुए, जिनमें एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही।

