नई दिल्ली,
पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध के तनाव में कमी आने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई थीं, लेकिन अगले ही दिन बाजार में नरमी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल वायदा कीमत 6.51 डॉलर या लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इसी तरह अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 6.12 डॉलर या करीब 6.5 प्रतिशत घटकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का सैन्य अभियान बहुत जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की जीत तब मानी जाएगी जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं बचेगी जो अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों के लिए खतरा बन सकें।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को यह भी चेतावनी दी कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश न करे। विशेष रूप से उन्होंने होरमुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मार्ग सुरक्षित रहेगा। उनके अनुसार वहां अमेरिका की नौसेना के कई जहाज तैनात हैं, जिससे तेल आपूर्ति मार्ग पर किसी तरह का खतरा नहीं होगा। होरमुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी क्षेत्र के देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर किसी तरह का खतरा उत्पन्न होता है तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने इजरायल के साथ संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर बड़े हमले किए थे। इन हमलों का उद्देश्य तेहरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को कमजोर करना बताया गया था। इससे पहले वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत एक समय 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत भी 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी। यह स्तर वर्ष 2022 के बाद सबसे ऊंचा माना गया।
भारत में बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के असर को लेकर सरकार का मानना है कि फिलहाल महंगाई पर इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा कि देश में महंगाई दर अभी निचले स्तर के करीब बनी हुई है, इसलिए तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीमित रह सकता है। वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक वर्ष से लगातार घटती प्रवृत्ति में थीं। हालांकि 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक टकराव शुरू होने के बाद कीमतों में तेजी देखने को मिली।

