Mumbai,
वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के चलते मंगलवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दोनों कीमती धातुएं लगभग 1 प्रतिशत तक कमजोर रहीं, जिससे निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है। Multi Commodity Exchange (MCX) पर 5 जून के लिए सोने का अनुबंध 0.34 प्रतिशत या 528 रुपये गिरकर 1,53,415 रुपये पर कारोबार करता दिखा। वहीं, सोना 10 ग्राम के हिसाब से 358 रुपये या 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,585 रुपये पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसने 1,53,992 रुपये का उच्च स्तर भी छुआ।
चांदी में भी तेज गिरावट दर्ज
दूसरी ओर, 5 मई के चांदी अनुबंध में करीब 0.92 प्रतिशत या 2,335 रुपये की गिरावट आई और यह 2,50,210 रुपये पर पहुंच गया। चांदी ने दिन के दौरान 2,51,743 रुपये का उच्च स्तर बनाया, लेकिन बाद में गिरकर 2,50,903 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जो 1,642 रुपये या 0.65 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। वैश्विक बाजारों में भी दोनों धातुओं पर दबाव बना रहा। सोना 0.43 प्रतिशत गिरकर 4,807 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.44 प्रतिशत गिरकर 78.885 डॉलर प्रति औंस पर रही।
भूराजनैतिक तनाव बना गिरावट का प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को लेकर अनिश्चितता और आगामी आर्थिक घटनाओं ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। इससे सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। बाजार इस बात को लेकर भी संशय में है कि क्या संघर्षविराम समाप्त होने से पहले शांति वार्ता आगे बढ़ेगी या नहीं। दोनों देशों की ओर से मिले अलग-अलग संकेतों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जाकर बातचीत करेगा। वहीं, ईरान के अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध जारी रहेगा, तब तक बातचीत की संभावना कम है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह संकेत भी मिले हैं कि तेहरान क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए बातचीत में शामिल हो सकता है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के झंडे वाले एक जहाज को पकड़े जाने की घटना ने भी भूराजनैतिक जोखिम को और बढ़ा दिया है।
निवेशकों का ध्यान नीतिगत फैसलों पर
विशेषज्ञों का कहना है कि भूराजनैतिक घटनाक्रम के साथ-साथ निवेशकों का ध्यान अब घरेलू आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंक से जुड़े फैसलों पर भी केंद्रित हो गया है। विशेष रूप से फेडरल रिजर्व के संभावित प्रमुख केविन वार्श की नीतिगत सोच को लेकर बाजार में चर्चा है, जिनका रुख सख्त मौद्रिक नीति की ओर माना जाता है। इसी रुझान के अनुरूप कच्चे तेल की कीमतों में भी लगभग 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। ब्रेंट कच्चा तेल 1.71 प्रतिशत गिरकर 93.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल 2 प्रतिशत गिरकर 85.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

