New Delhi,
केंद्र सरकार ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए लागू की गई Production Linked Incentive Scheme for Food Processing Industry (PLISFPI) योजना ने देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और निर्यात को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को कुल 2,162.55 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।
उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि
सरकारी बयान के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता में प्रति वर्ष 34 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इस योजना के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे उद्योग को मजबूती मिली है। योजना के तहत कुल 165 आवेदनों को मंजूरी दी गई है, जो 274 परियोजना स्थलों से जुड़े हुए हैं। इस योजना ने 9,207 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किया है और लगभग 3.39 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। यह आंकड़ा निर्धारित 2.5 लाख रोजगार के लक्ष्य से काफी अधिक है।
एमएसएमई क्षेत्र को मिला सहारा
स्वीकृत 165 आवेदनों में से 69 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) श्रेणी के हैं। इसके अलावा, 40 अनुबंध निर्माण इकाइयां, जो मुख्य स्वीकृत कंपनियों से जुड़ी हैं, भी एमएसएमई श्रेणी में आती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस योजना ने पूरे मूल्य श्रृंखला में छोटे उद्योगों को जोड़ने का कार्य किया है। सरकार ने बताया कि 20 पात्र एमएसएमई इकाइयों को 13.26 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है। 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ यह योजना वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य 33,494 करोड़ रुपये के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी
देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने हाल के वर्षों में निरंतर वृद्धि दर्ज की है। सकल मूल्य वर्धन 2014-15 में 1.34 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 2.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही, कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो 2014-15 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हो गई है। यह भारत के वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
मिलेट आधारित उत्पादों को प्रोत्साहन
इस योजना से हुई बचत के आधार पर वित्त वर्ष 2023 में एक नया घटक शुरू किया गया, जिसे Production Linked Incentive Scheme for Millet-Based Products नाम दिया गया। 800 करोड़ रुपये के बजट के साथ इस पहल का उद्देश्य रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट उत्पादों में मोटे अनाज को बढ़ावा देना है। यह योजना देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने, छोटे और मध्यम उद्यमों में नवाचार को प्रोत्साहित करने और भारतीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

