शक्ति, पराक्रम और भक्ति के प्रतीक भगवान हनुमान जी की जयंती आज श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। उनकी पूजा करने से शारीरिक बल, मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। हनुमान जयंती पर व्रत और पूजा करने से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हनुमान जयंती आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। हनुमान जी की पूजा करने से भय पर काबू पाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में सहायता मिलती है। भक्त मानते हैं कि वे चिरंजीवी हैं अमर और आज भी उनका आह्वान करने वालों की रक्षा करते हैं। उनका नाम जपना या हनुमान चालीसा पढऩा नकारात्मकता से बचाव का कवच जैसा प्रतीत होता है। इसीलिए कठिन समय में लोग उनकी शरण में आते हैं। हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। वे भगवान राम के परम भक्त थे और उनकी सेवा में समर्पित रहे। हनुमान जी की भक्ति और समर्पण के कारण उन्हें अमरता का वरदान मिला। हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं और पवन देव (वायु) के पुत्र हैं। माता अंजना के गर्भ से चैत्र पूर्णिमा को इनका जन्म हुआ था। वे जन्म से ही अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी थे। उन्हें भगवान राम के प्रति उनकी असीम निष्ठा के लिए जाना जाता है, जिन्होंने रामायण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हनुमान जी का जीवन सिखाता है कि नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा सबसे बड़ी भक्ति है। अत्यधिक शक्ति होने के बावजूद हनुमान जी हमेशा भगवान राम के सामने विनम्र रहे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी धैर्य नहीं खोया और बुद्धि से काम लिया। करत-करत अभ्यास के सिद्धांत को अपनाकर उन्होंने असंभव कार्य को भी संभव बनाया।

