अगस्त में जोरदार निवेश
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आ रहा है। Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने अगस्त में 29 अगस्त तक भारतीय Equities में कुल ₹30,918 करोड़ का निवेश किया है। इसमें ₹18,790 करोड़ Exchanges के जरिए और ₹12,128 करोड़ Primary Market और Others कैटेगरी के माध्यम से लगाए गए हैं। खास बात यह है कि यह लगातार दूसरा महीना है, जब FPIs भारतीय बाजार में Net Buyers बने हैं।
निवेश बढ़ने की वजह
Geojit Investments Ltd. के Chief Investment Strategist Dr VK Vijayakumar के अनुसार, भारत में FPI Flows बढ़ने के पीछे Chip Trade में आया Reversal, रुपये की स्थिरता और सबसे महत्वपूर्ण भारत में Earnings Growth में सुधार प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि हाल के समय में विदेशी निवेश का रुख SMIDs यानी Midcap और Smallcap Stocks की ओर भी बढ़ा है।
SMIDs पर बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों के मुताबिक Midcap और Smallcap कंपनियों में Growth और Earnings Momentum Largecap कंपनियों की तुलना में अधिक है। ऐसे में SMIDs की ओर FPI Investment का यह रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना है। घरेलू Liquidity ने भी व्यापक बाजार को मजबूती दी है।
DII ने संभाला बाजार
शुक्रवार को Foreign Institutional Investors (FIIs) की Selling Pressure का मुकाबला Domestic Institutional Investors (DIIs) की मजबूत खरीदारी ने किया। DIIs ने करीब ₹5,184 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला। वहीं Month-to-Date आधार पर FIIs करीब ₹454 करोड़ के मामूली Net Buyers बने हुए हैं।
लगातार तीसरे सप्ताह दबाव
हालांकि शुक्रवार को IT Stocks में मजबूत खरीदारी से बाजार में तेजी लौटी, लेकिन Global Interest Rates, Geopolitical Uncertainty और नए Closing Auction Session को लेकर चिंता के कारण Benchmark Indices दबाव में रहे। लगातार तीसरे सप्ताह Nifty और Sensex में गिरावट दर्ज हुई।
Nifty और Sensex का प्रदर्शन
सप्ताह के दौरान Nifty करीब 0.31 प्रतिशत गिरकर 24,175.65 पर बंद हुआ, जबकि Sensex लगभग 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,264.51 पर रहा। इसके बावजूद Midcap और Smallcap Indices में तेजी रही, जो Domestic Liquidity और Stock-Specific Buying की मजबूती को दर्शाती है।
Closing Auction Session पर नजर
Religare Broking Ltd. के SVP, Research Ajit Mishra के अनुसार, F&O Stocks के लिए Closing Auction Session की शुरुआत भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। Monthly Derivatives Expiry के दौरान Closing Auction में तेज Price Movements देखने को मिले, जिससे खासकर Heavyweight Stocks में Short-Term Volatility और Price Dislocations को लेकर चिंता बढ़ी है।

