भारत में मिर्गी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके बारे में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और इससे प्रभावित लोगों की सहायता करने को लेकर आज राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत वर्ष, 2009 में मिर्गी फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा की गई। इसकी स्थापना डॉ. निर्मल सूर्या ने की, ताकि मिर्गी के रोगियों के उपचार और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। यह दिन आम जनता को मिर्गी की स्थिति और इसके कारणों के बारे में शिक्षित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। मिर्गी से जुड़े सामाजिक कलंक और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया जाता है, जिससे मरीजों को खुलकर जीने और उपचार कराने में मदद मिल सके। यह दिवस मिर्गी से पीडि़त व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए सहायता और सहानुभूति को बढ़ावा देता है। मिर्गी के प्रबंधन के लिए उपलब्ध उपचारों और सहायता के बारे में जानकारी फैलाने पर जोर दिया जाता है, जिससे लोग उचित देखभाल पा सकें। मिर्गी एक तंत्रिका संबंधी स्थिति है, जिसकी विशेषता अनियमित मस्तिष्क गतिविधि है। इसके परिणामस्वरूप दौरे पड़ते हैं या अजीब व्यवहार, संवेदनाएं और कभी-कभी चेतना का नुकसान होता है। मिर्गी सभी उम्र, जातीयता और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित कर सकती है। दौरे कई तरह से पड़ सकते हैं। मिर्गी से पीडि़त कुछ लोग दौरे के दौरान कुछ देर तक आवेगपूर्ण तरीके से घूरते रहते हैं, जबकि अन्य लगातार अपने अंगों या टांगों को हिलाते रहते हैं। एक बार का दौरा हमेशा मिर्गी का संकेत नहीं होता। मिर्गी के निदान के लिए आमतौर पर कम से कम दो अकारण दौरे पड़ते हैं जो कम से कम 24 घंटे के अंतराल पर होते हैं। अधिकांश मिर्गी रोगी दवा से अपने दौरे को नियंत्रित कर सकते हैं, जबकि कुछ (दुर्लभ) रोगियों को शल्य चिकित्सा उपचार की आवश्यकता हो सकती है। मिर्गी दूसरा सबसे प्रचलित और अक्सर देखा जाने वाला तंत्रिका संबंधी विकार है। वर्ष, 2018 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 7 करोड़ लोग मिर्गी से पीडि़त हैं, जिनमें से 1.2 करोड़ से अधिक भारतीय इससे प्रभावित हैं।

