ईरान और इजरायल के बीच शुरू हुए युद्ध को 10 दिन पूरे हो चुके हैं। दोनों देशों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसका भारत समेत कई देशों पर बुरा असर पड़ेगा। क्रूड ऑयल सहित एलपीजी गैस सप्लाई बाधित हो जाएगी। वहीं जगह-जगह पेट्रोल व डीजल की किल्लत भी देखने को मिलेगी। अभी से राजस्थान के अधिकांश पेट्रोल पम्पों पर पॉवर का पेट्रोल मिल रहा है। पेट्रोल पम्प मालिक नॉर्मल पेट्रोल ना आने की दुआई दे रहे हैं। एक तरफ ना तो ट्रंप सरकार युद्ध को समाप्त करने को राजी है और ना ही ईरान की सरकार इसे विराम देने के मूड में है। ऐसे में आमजन परेशान होते दिख रहे हैं। उन्हें भय सता रहा है कि अगर युद्ध लंबा चला तो गैस व पेट्रोल-डीजल सप्लाई पूरी तरह से ठप्प हो जाएगी। जनजीवन पूरी तरह से गड़बड़ाने के आसार नजर आ रहे हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा गया है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कृषि उत्पादों जैसे बासमती चावल, चाय का निर्यात भी रुक सकता है और माल ढुलाई तथा बीमा लागत बढ़ जाएगी। वहीं शिपिंग कंपनियों की ओर से इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लगाने से व्यापारिक लागत काफी बढ़ जाएगी। ब्रेंट कू्रड की कीमतें बढऩे से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत बढऩे से हर चीज महंगी हो जाएगी। एयरलाइन, पेट्रोकेमिकल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत बढ़ेगी, जिससे कॉर्पोरेट मुनाफा कम होगा। भारत को अपने तेल के रणनीतिक भंडार का उपयोग करना पड़ सकता है, जो केवल कुछ हफ्तों के लिए ही पर्याप्त है। ऐसे में सभी देशों को साझा बातचीत का प्रयास कर युद्ध को रोकने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

