कोरोना महामारी के बाद से वेयरहाउसिंग मार्केट में काफी उछाल आया है। इस सेक्टर में रिकॉर्ड से अधिक की मांग देखी गई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब २९ फीसदी ज्यादा है। इससे निवेशकों और डेवलपर्स में उत्साह देखा जा रहा है। जहां भारत का ग्रेड वेयरहाउसिंग स्टॉक शीर्ष 8 शहरों में वर्ष, 2030 तक 50 करोड़ वर्ग फुट को पार करने की संभावनाएं है और 2047 तक यह 2 बिलियन वर्ग फुट तक बढ़ सकता है। जो विकास कार्यक्रमों, निर्माण विस्तार और लॉजिस्टिक्स आधुनिकीकरण को मजबूत करेगा। इस वृद्धि से क्षेत्रीय विकास को संतुलित गति से बढ़ावा मिलेगा और भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार के नए विकास क्षेत्रों के रूप में कई छोटे शहरों को स्थिति मिल सकेगी। भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार एक ऐसे स्तर पर प्रवेश कर रहा है, जहां तेजी से परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन नीति प्रोत्साहन, इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठन और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के कारण हो रहा है। भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 17 प्रतिशत का योगदान देता है, और अनुमान है कि 2035 तक यह हिस्सा बढक़र करीब 25 प्रतिशत हो जाएगा। जहां वेयरहाउसिंग की मांग में बढ़ोतरी से निवेश में वृद्धि होगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। वेयरहाउसिंग सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे देश की बेरोजगारी दर में कमी आएगी। वेयरहाउसिंग की मांग में बढ़ोतरी से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास होगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। वैसे भारत सरकार ने वेयरहाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि वेयरहाउसिंग के लिए सब्सिडी प्रदान करना और वेयरहाउसिंग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना आदि शामिल है।

