Monday, July 6, 2026 |
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भारत के एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से जुड़ा

ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ा

by Business Remedies
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LNG vessels passing through the Strait of Hormuz and India's dependence on gas supplies

नई दिल्ली,

भारत के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आने के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर काफी निर्भर बना हुआ है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में देश के कुल एलएनजी आयात का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आया, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर या उसके आसपास के मार्ग से गुजरता है। यह मात्रा लगभग 1 करोड़ 75 लाख टन बताई गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गैस प्राधिकरण लिमिटेड द्वारा अमेरिका के साथ किए गए एलएनजी अदला-बदली समझौते को समायोजित कर लिया जाए तो भी वास्तविक निर्भरता लगभग 66 प्रतिशत के आसपास रहती है। इसका अर्थ यह है कि भारत के एलएनजी आयात में एक ही मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है और इससे आपूर्ति से जुड़ा जोखिम महत्वपूर्ण बना रहता है। विश्लेषकों के अनुसार यदि होर्मुज़ मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है तो इसका प्रभाव पूरे गैस क्षेत्र पर क्रमिक रूप से दिखाई दे सकता है। सबसे पहले एलएनजी टर्मिनल के उपयोग स्तर पर असर पड़ सकता है, इसके बाद गैस परिवहन नेटवर्क की क्षमता और अंततः औद्योगिक इकाइयों के लाभांश पर भी दबाव पड़ सकता है। टर्मिनल स्तर पर सबसे अधिक जोखिम पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के दहेज टर्मिनल पर देखा गया है। वर्ष 2025 में इस टर्मिनल ने लगभग 1 करोड़ 48 लाख टन एलएनजी का प्रबंधन किया, जिसमें से करीब 76 प्रतिशत मात्रा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोच्चि और छारा जैसे छोटे एलएनजी टर्मिनल पूरी तरह मध्य पूर्व से आने वाली गैस पर निर्भर हैं। वहीं मुंद्रा टर्मिनल की लगभग 88 प्रतिशत, धामरा टर्मिनल की लगभग 65 प्रतिशत और एन्नोर टर्मिनल की करीब 62 प्रतिशत आपूर्ति भी इसी मार्ग से आती है, जिससे इन स्थानों पर जोखिम का स्तर अधिक माना जा रहा है।

हालांकि हजीरा टर्मिनल की लगभग 25 प्रतिशत निर्भरता और दबोल टर्मिनल की शून्य निर्भरता उन्हें कुछ हद तक सुरक्षित बनाती है, क्योंकि इन स्थानों पर एलएनजी की आपूर्ति अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से होती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड और गुजरात राज्य पेट्रोनेट लिमिटेड इस स्थिति में सबसे अधिक संवेदनशील कंपनियों में शामिल हैं। पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड की लगभग 77 प्रतिशत निर्भरता सीधे होर्मुज़ मार्ग पर है, जिससे उसके पुनर्गैसीकरण से मिलने वाली आय पर सीधा असर पड़ सकता है। कंपनी ने कतर के रस लाफान में आई आपूर्ति बाधा का हवाला देते हुए गैस प्राधिकरण लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को ‘फोर्स मेज्योर’ नोटिस भी जारी किए हैं।

इसी तरह गुजरात राज्य पेट्रोनेट लिमिटेड की वर्ष 2025 में गैस परिवहन मात्रा का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर बताया गया है, जिससे कंपनी को भी संभावित आपूर्ति झटकों का सामना करना पड़ सकता है। गुजरात गैस लिमिटेड पर भी इसका दोहरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। कंपनी की कुल गैस आपूर्ति में लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा एलएनजी का है, जो मुख्य रूप से मोरबी के औद्योगिक क्षेत्र को दिया जाता है। यदि एलएनजी के तत्काल बाजार भाव बढ़ते हैं तो इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ सकता है, क्योंकि उद्योग वैकल्पिक ईंधन जैसे प्रोपेन की ओर रुख कर सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने अपने औद्योगिक ग्राहकों को ‘फोर्स मेज्योर’ नोटिस जारी कर दिए हैं और 6 March 2026 से गैस आपूर्ति में कटौती लागू की जा सकती है। साथ ही औद्योगिक ग्राहकों के लिए प्रतिदिन अनुबंधित गैस मात्रा में भी कमी की संभावना जताई गई है। वहीं गैस प्राधिकरण लिमिटेड का विपणन खंड अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में माना गया है। कंपनी की निर्भरता होर्मुज़ मार्ग पर केवल लगभग 16 प्रतिशत बताई गई है। अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ विविध गैस आपूर्ति समझौतों के कारण कंपनी को आपूर्ति जोखिम से कुछ हद तक सुरक्षा मिली हुई है। हालांकि वास्तविक निर्भरता लगभग 30 प्रतिशत के आसपास आंकी गई है।



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