प्रेस स्वतंत्रता दिवस आज दुनियाभर के देशों में मनाया जाएगा, ताकि पत्रकारिता की आजादी और निष्पक्ष मीडिया की अहमियत को समझा जा सके। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आज के ही दिन विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, जिसे प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सरकारों को 1948 के मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करने और उसे बनाए रखने के उनके कर्तव्य की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक स्वतंत्र प्रेस लोकतंत्र की रीढ़ है और पत्रकारों की सुरक्षा, सत्य और पारदर्शिता के लिए खड़े होना बेहद जरूरी है। जहां समाज में सही जानकारी देना कितना जरूरी है। पत्रकार और मीडिया वह पुल हैं, जो जनता को सच से जोड़ते हैं। यह दिन उन सभी पत्रकारों को सम्मान देने का अवसर है, जो ईमानदारी और निडरता से सच्चाई सामने लाने का काम करते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना क्यों न करना पड़े? प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। अगर मीडिया स्वतंत्र नहीं होगा तो गलत जानकारी फैल सकती है। पत्रकारिता ही किसी भी राष्ट्र के सिंहासन का दर्पण होता है, जो सिंहासन के समक्ष प्रजा का पक्ष रखती है। बेहतर पत्रकारिता के बल पर ही युवाओं को जनहित के लिए प्रेरित किया जा सकता है। पत्रकारिता ही युवाओं के सपनों को नया स्वरुप दे सकती है, जिससे वो सफलता के शीर्ष पर पहुंच सकें। पत्रकारिता के मंच से युवाओं का मार्गदर्शन किया जा सकता है, साथ ही उनके विश्वास में मजबूती प्रदान की जा सकती है। पत्रकारिता केवल पैसा कमाने का एक पेशा नहीं, बल्कि यह तो एक ऐसा पेशा है जो समाज की चेतना जगाने का काम करता है। इसलिए 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मान्यता दी। यह दिन 1991 में बनी विंडहोक घोषणा की याद में मनाया जाता है, जिसमें अफ्रीकी पत्रकारों ने आजाद प्रेस की जरूरत को बताया था।

