आधुनिकता और भागदौड़ वाली जिंदगी में आज सिगरेट का सेवन एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है। युवाओं से लेकर युवतियां इसके गिरफ्त में आते जा रहे हैं। चाय की दुकान हो या फिर सैर-सपाटे की जगह युवतियां भी सिगरेट के धुएं को उड़ाते नजर आती हैं। तंबाकू के दुष्प्रभावों से अनभिज्ञ यह युवा व युवतियां इसके सेवन से अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते जा रहे हैं। धूम्रपान के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने तथा तंबाकू सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य को लेकर आज विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाएगा।
यह एक वैश्विक जागरूकता दिवस है, जिसकी शुरुआत World Health Organization (WHO) की ओर से की गई थी। यह दिवस केवल सिगरेट तक सीमित नहीं है, बल्कि बीड़ी, गुटखा, खैनी, हुक्का, ई-सिगरेट और अन्य निकोटीन उत्पादों के खिलाफ भी जागरूकता फैलाता है। इस वर्ष की थीम आकर्षण का असली चेहरा उजागर करना और निकोटीन व तंबाकू की लत का मुकाबला करना रहेगी। इस थीम का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि तंबाकू और निकोटीन कंपनियां आकर्षक पैकेजिंग, फ्लेवर और विज्ञापनों के माध्यम से युवाओं को लत की ओर आकर्षित करती हैं।
वर्ष 1987 में World Health Organization (WHO) की विश्व स्वास्थ्य सभा ने तंबाकू महामारी के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस दिवस की स्थापना की। पहला World No Tobacco Day वर्ष 1988 में वैश्विक स्तर पर मनाया गया। इसका उद्देश्य तंबाकू से होने वाली मौतों और बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा सरकारों को सख्त तंबाकू नियंत्रण नीतियां लागू करने के लिए प्रेरित करना है।
धूम्रपान के सेवन से कई गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती हैं, जैसे फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, अस्थमा, क्रॉनिक फेफड़े की बीमारी और मुख एवं गले का कैंसर मुख्य हैं। वैसे तो सरकार भी इस पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठा रही है। इसमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, सिगरेट पैकेट पर चेतावनी चित्र, तंबाकू विज्ञापनों पर रोक, जागरूकता अभियान और धूम्रपान छोड़ने के लाभ बताकर लोगों को सावचेत करती रहती है। यदि लोग जागरूक होकर तंबाकू से दूरी बनाएं, तो लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं।

