हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस मनाया जाएगा। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रकृति और अपने अस्तित्व के बीच के नाजुक संतुलन को समझने का अवसर है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी, सुरक्षित भोजन और संतुलित पारिस्थितिकी मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक हैं। यह दिवस लोगों को यह संदेश देता है कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल प्रकृति बचाने का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और आने वाली पीढिय़ों के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यावरणीय खतरों और उनके स्वास्थ्य पर पडऩे वाले प्रभावों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। आज वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, रासायनिक प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2011 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ की ओर से की गई थी। इस पहल का उद्देश्य दुनियाभर के देशों में पर्यावरण स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा देना और लोगों, संस्थाओं तथा सरकारों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था। यह दिवस लोगों को सीख देता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, पेड़ लगाना, जल संरक्षण, स्वच्छता बनाए रखना और ऊर्जा की बचत करना पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्वस्थ पर्यावरण ही स्वस्थ समाज की नींव है। पर्यावरण स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना, जल स्रोतों की सुरक्षा करना और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। साथ ही शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

