Tuesday, September 22, 2026 |
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म्यूल बैंक खातों पर काली छाया

by Business Remedies
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निवेश के नाम पर सपनों को बेचने वाले ठगों का गिरोह अब नई तकनीक और पुरानी चाल का मिश्रण अपना रहा है। हालिया कार्रवाइयों में सामने आया है कि आरोपी म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराकर और एपीके आधारित एप्लिकेशन के जरिए साइबर ठगी कर रहे थे। जांच में साफ हुआ कि ठगी की रकम सीधे मुख्य आरोपियों के खातों में नहीं जाती, बल्कि ऐसे बैंक खातों के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाई जाती है, ताकि निशान मिट जाएं। यह तरीका साइबर अपराध को और जटिल बना रहा है। म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं, जो अक्सर बेरोजगार या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से किराए पर या छोटे कमीशन के बदले ले लिए जाते हैं। इन खातों में ठगी का पैसा आता है और फिर तुरंत दूसरे खातों या क्रिप्टो वॉलेट में भेज दिया जाता है। एपीके फाइलें यानी दुर्भावनापूर्ण ऐप इन खातों को दूर से संचालित करने में मदद करती हैं। ओटीपी और एसएमएस को आगे भेजने वाले ऐसे ऐप ठगों को खातों पर पूरा नियंत्रण देते हैं। पीडि़त निवेश का वादा सुनकर पैसा ट्रांसफर करता है, पर रिटर्न कभी नहीं मिलता।
यह समस्या सिर्फ एक शहर या एक गिरोह तक सीमित नहीं। देशभर में निवेश, ट्रेडिंग या वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर हो रही ठगी में म्यूल खातों का जाल फैल चुका है। बैंकों की केवाईसी व्यवस्था और निगरानी तंत्र में खामियां इस नेटवर्क को फलने-फूलने का मौका देती हैं। पुलिस की कार्रवाई स्वागतयोग्य है, पर गिरफ्तारियां अक्सर निचले स्तर के सहयोगियों तक ही सीमित रह जाती हैं। असली मास्टरमाइंड अक्सर राज्य या देश की सीमाओं के पार छिपे रहते हैं। आम नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है। अज्ञात लिंक या ऐप डाउनलोड करने, ऊंचे रिटर्न के वादे पर विश्वास करने और अपने बैंक खाते का विवरण किसी को देने से बचना चाहिए। बैंकों को भी संदिग्ध लेन-देन पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी। सरकार और नियामक एजेंसियों को म्यूल खातों की पहचान के लिए तकनीक और समन्वय मजबूत करना होगा। साइबर ठगी अब केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और भरोसे पर हमला है। जब तक म्यूल खातों का नेटवर्क नहीं तोड़ा जाता, निवेश के नाम पर ठगी का सिलसिला थमने वाला नहीं। सतर्कता, सख्ती और जागरूकता ही इस काली छाया से बचाव का रास्ता है।



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