विश्वभर में आज Date 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों, समुदायों, उद्योगों और सरकारों को पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरित करना है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन के बीच पर्यावरण की रक्षा को लेकर व्यापक जनभागीदारी की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। पेड़-पौधे पर्यावरण की शुद्धता और हरितिमा के प्रमुख आधार हैं। यदि पेड़ हैं तो स्वच्छ वायु, संतुलित जलवायु और स्वस्थ जीवन संभव है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की Theme जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल और सामूहिक कार्रवाई पर केंद्रित है। बढ़ता तापमान, समुद्र-स्तर में वृद्धि, सूखा, बाढ़ तथा जैव-विविधता में कमी जैसी समस्याएं पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल वैश्विक सहयोग और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाकर ही संभव है। इस वर्ष वैश्विक समारोहों की मेजबानी अज़रबैजान की राजधानी बाकू में की जा रही है। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को गति देने और विभिन्न देशों को साझा रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित करने पर Focus करता है। अज़रबैजान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करने तथा पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
इसके साथ ही यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय जलवायु चर्चाओं में अज़रबैजान की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। देश वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों और सतत विकास उद्देश्यों के अनुरूप अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रभावी समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण है। वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानव पर्यावरण पर आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के पहले दिन विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना का निर्णय लिया था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में पहली बार विश्व के नेताओं ने पर्यावरणीय गिरावट को केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर वैश्विक संकट के रूप में स्वीकार किया था।
इसके बाद वर्ष 1973 में पहली बार आधिकारिक रूप से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। उस समय इसका नारा “केवल एक पृथ्वी” रखा गया था, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है। समय के साथ यह दिवस दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय जनजागरूकता अभियानों में शामिल हो गया है। विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। यह दिवस लोगों को पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूक करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का संदेश देता है। वर्तमान परिस्थितियों में पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना ही पृथ्वी के बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

