New Delhi,
सरकार की ‘वोमनिया’ पहल ने वित्त वर्ष 2026 में उल्लेखनीय विस्तार हासिल किया है। इस पहल के तहत 2.1 लाख से अधिक महिला सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर पंजीकृत हुए हैं और इन्हें कुल 13.7 लाख ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। सरकारी बयान के अनुसार, महिला उद्यमों को लगभग 28,000 करोड़ रुपये के अनुबंध प्रदान किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27.60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में इस योजना की सफलता को स्पष्ट करती है।
सरकारी खरीद में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
वित्त वर्ष 2026 में कुल ऑर्डर में महिला एमएसई की हिस्सेदारी 5.6 प्रतिशत रही, जो निर्धारित 3 प्रतिशत लक्ष्य से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी खरीद प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। यह पहल महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को सीधे सरकारी खरीदारों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती है। इसके माध्यम से महिलाएं बिना किसी बिचौलिये के अपने उत्पाद बेच सकती हैं, जिससे उनकी आय और आत्मनिर्भरता में वृद्धि हो रही है। इस योजना के तहत एक विशेष डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराया गया है, जिससे महिलाओं के लिए पंजीकरण और व्यापार करना आसान हो गया है। साथ ही, आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर महिलाओं को सरकारी खरीदारों से जोड़ने के लिए व्यवस्थित मार्ग तैयार किया गया है। इस योजना में हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट, कॉयर, गृह सज्जा और कार्यालय साज-सज्जा जैसी श्रेणियों को शामिल किया गया है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की महिला उद्यमियों को लाभ मिल रहा है।
जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण और सहायता
जिला प्रशासन, उद्यम सहायता केंद्र और प्रशिक्षण संस्थान मिलकर महिलाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए अभियान चला रहे हैं। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पाद सूची तैयार करने की कार्यशालाएं और पंजीकरण अभियान आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे महिला उद्यमियों की तैयारी बेहतर हो रही है। यह पहल पारंपरिक उत्पादन क्षमताओं को औपचारिक और टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद कर रही है। सरकार के अनुसार, जैसे-जैसे अधिक महिलाएं इस प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और अपनी क्षमताओं का विकास कर रही हैं, यह पहल केवल खरीद तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता और व्यापक प्रतिनिधित्व का माध्यम बन रही है। डिजिटल प्रणाली के तहत पंजीकरण, निविदा प्रक्रिया, ऑर्डर, बिलिंग और भुगतान सभी कार्य ऑनलाइन किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है। इससे महिला उद्यमियों और सरकारी खरीदारों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है।




