New Delhi,
भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा द्वारा भारत के विकास मॉडल की सराहना से जुड़ी एक रिपोर्ट को प्रमुखता से साझा किया। इस रिपोर्ट में रोजगार सृजन को विकास की मुख्य रणनीति बताया गया है और भारत के सहकारी मॉडल को scalable growth का प्रभावी उदाहरण माना गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय द्वारा social media platform X पर साझा की गई इस जानकारी में यह स्पष्ट किया गया कि रोजगार आधारित विकास को अब वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व मिल रहा है। यह भी दर्शाता है कि भारत का विकास दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहा है। अजय बंगा ने अपने बयान में कहा कि विकास को केवल व्यक्तिगत परियोजनाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे व्यापक परिणामों जैसे रोजगार सृजन और आर्थिक अवसरों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कोई दान नहीं, बल्कि एक सुविचारित रणनीति है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर और सतत विकास के लिए रोजगार के अवसरों का निर्माण सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। यदि पर्याप्त रोजगार नहीं बनते हैं, तो आर्थिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। Washington में होने वाली विश्व बैंक और IMF की Spring Meetings से पहले अजय बंगा ने एक बड़ी चुनौती की ओर संकेत किया। उन्होंने बताया कि अगले 15 वर्षों में लगभग 1.2 अरब युवा कार्यबल में प्रवेश करेंगे, लेकिन इसके अनुरूप रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो पाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रोजगार सृजन की गति धीमी रही, तो यह वैश्विक स्तर पर सामाजिक अस्थिरता और प्रवासन के दबाव को बढ़ा सकता है। रोजगार बढ़ाने के लिए अजय बंगा ने तीन मुख्य उपाय सुझाए। इनमें बुनियादी ढांचे में निवेश, व्यापार के अनुकूल नीतिगत सुधार और वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुंच शामिल है। उनका मानना है कि इन उपायों से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और नए रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे।
इन क्षेत्रों में सबसे अधिक रोजगार की संभावना
उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएं, विनिर्माण और पर्यटन जैसे क्षेत्र रोजगार सृजन के प्रमुख आधार बन सकते हैं। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। अजय बंगा ने अपने अनुभव साझा करते हुए भारत के दुग्ध सहकारी मॉडल की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि इस मॉडल ने छोटे उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद की है। तकनीक और संगठन के सही उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर नहीं मिलते हैं, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

