नई दिल्ली,
केंद्र सरकार आज संसद में Economic Survey 2026 पेश करने जा रही है। यह सर्वे Union Budget 2026-27 से पहले रखा जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा का आधिकारिक संकेत मिलेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह दस्तावेज तय करेगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था किस गति से आगे बढ़ रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोपहर लगभग 12 बजे Economic Survey पेश करेंगी। इस दौरान सबसे अधिक ध्यान चालू वित्त वर्ष FY26 और आगामी वित्त वर्ष FY27 के लिए भारत के अनुमानित GDP Growth Estimates पर रहेगा। आर्थिक जानकारों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि विकास दर को लेकर सरकार का आकलन क्या संकेत देता है। Economic Survey को बजट से पहले का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें देश के वार्षिक आर्थिक विकास का सार प्रस्तुत किया जाता है और अल्पकालिक तथा मध्यम अवधि की संभावनाओं का खाका तैयार किया जाता है। यह दस्तावेज विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति, चुनौतियों और सुधारों का विस्तृत विश्लेषण भी प्रस्तुत करता है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने भी गुरुवार को प्रकाशित एक लेख में रुपये में गिरावट, भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक उतार-चढ़ाव जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है, लेकिन दीर्घकालिक आधार मजबूत बना हुआ है। इस बीच संसद का Budget Session बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधन के साथ शुरू हुआ। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में वर्ष 2026 को विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि नए सहस्राब्दी के पहले पच्चीस वर्षों ने देश को कई उपलब्धियां और आत्मविश्वास प्रदान किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के संबोधन को व्यापक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि इसमें विकसित भारत के निर्माण का स्पष्ट दृष्टिकोण झलकता है और आत्मनिर्भर भारत की सामूहिक आकांक्षा को मजबूती मिलती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत आधार तैयार किया है, जो भविष्य की तेज विकास दर का मार्ग प्रशस्त करेगा। अब आर्थिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि Economic Survey में सरकार किन सुधारों, नीतिगत प्राथमिकताओं और विकास रणनीतियों पर जोर देगी। GDP Growth Estimates के अलावा राजकोषीय संतुलन, निवेश प्रवाह, रोजगार सृजन और वैश्विक जोखिमों के प्रभाव जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे।

