अमेरिका-ईरान की बीच शांति समझौते पर गत दिनों सहमति तो बनी है, पर कितने समय तक यह टिकाऊ रहती है? वह वक्त ही बताएगा। हालांकि राष्ट्रपति Donald Trump ने इसका ऐलान किया है, वहीं ईरान ने भी इसकी पुष्टि की है। Trump ने रणनीतिक रूप से अहम Hormuz को दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने और नाकाबंदी को भी हटाने की घोषणा की। यह युद्ध इस वर्ष ही 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुआ था। यदि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के बीच हुई डील टिकाऊ साबित होती है, तो भारत की अर्थव्यवस्था को कई बड़े फायदे होंगे। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डील में क्या-क्या शामिल है-जैसे प्रतिबंधों में ढील, तेल निर्यात की बहाली और Hormuz जलडमरूमध्य का खुलना। संकेतों के आधार पर तेल बाजार में राहत दिखी है और भारत जैसे तेल आयातक देशों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी से अधिक आयात करता है। जब ईरान से तेल की आपूर्ति बढ़ती है और क्षेत्र में तनाव घटता है, तो वैश्विक तेल कीमतें नीचे आती हैं।
इससे पेट्रोल और डीजल की लागत कम हो सकती है। सरकार का आयात बिल घटेगा। कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी। वहीं Airline, Paint, Chemical और Logistics कंपनियों को लाभ होगा। जहां भारत के लिए तेल कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट अरबों डॉलर की बचत करा सकती है। Reserve Bank of India ब्याज दरें कम रखने में सहज हो सकता है। इससे डॉलर की मांग घट सकती है। रुपया मजबूत हो सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। वहीं अमेरिकी-ईरान समझौते की खबर से भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई और विदेशी निवेशकों की वापसी देखी गई है। Airlines, Automobile, Cement, Chemical और Logistics सेक्टर में भी भारत को काफी राहत मिल सकती है। भारत पहले ईरान से काफी मात्रा में तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण खरीद लगभग बंद हो गई थी। यदि प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो भारत फिर से ईरानी तेल आयात बढ़ा सकता है।

