नई दिल्ली,
केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए Union Budget 2026 में नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उद्योग जगत के नेताओं ने कहा है कि एआई मिशन, नेशनल क्वांटम मिशन, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंड और रिसर्च एंड इनोवेशन फंड जैसी पहलों से उच्च शिक्षा संस्थानों को बड़ी मजबूती मिलेगी, जो भारत के भविष्य के उद्यमियों और उद्योग नेतृत्व को तैयार कर रहे हैं।
यह बजट संकेत देता है कि भारत अब केवल तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक क्षमता निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में नेतृत्व मजबूत आधार से शुरू होता है, जिसमें एआई, सेमीकंडक्टर, क्लाउड और डाटा संरचना पर विशेष बल दिया गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया एआई मिशन को सुदृढ़ करने से एआई अनुसंधान, तैनाती और नैतिक प्रशासन को विभिन्न क्षेत्रों में तेज गति मिलेगी। विशेषज्ञों ने कहा कि यह केवल तकनीकी एजेंडा नहीं है। बजट में एआई निवेश को कौशल विकास, कार्यबल की तैयारी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के सशक्तिकरण से जोड़ा गया है, जिससे समावेशन और प्रतिस्पर्धात्मकता को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके। तकनीक को विविध क्षेत्रों में शामिल करने की रणनीति से खेतों में किसानों को लाभ मिलेगा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तथा युवाओं को नई संभावनाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकेगा। शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट में .Rs.139289 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान .Rs.121949 करोड़ से 14.2 प्रतिशत अधिक है। हालांकि संशोधित अनुमान के अनुसार शिक्षा पर वास्तविक व्यय बजट प्रावधान से 5 प्रतिशत कम रहा।
बजट में प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक गलियारों के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन टाउनशिप में अनेक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, शोध संस्थान और कौशल केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य, जहां मजबूत विनिर्माण आधार और उच्च शिक्षा संस्थान मौजूद हैं, इस पहल के लिए उपयुक्त रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि भारत की अगली विकास यात्रा एआई आधारित डिजिटल क्षमताओं, व्यापक कौशल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिस्पर्धी तकनीकी सेवाओं से संचालित होगी। शिक्षा से रोजगार और उद्यम ढांचा पाठ्यक्रम और उद्योग के बीच की खाई को पाटने में सहायक होगा, विशेषकर एआई, डाटा इंजीनियरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे उभरते क्षेत्रों में।
इसके साथ ही टियर 2 और टियर 3 क्षेत्रों को डिजिटल अर्थव्यवस्था जोन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है, जिससे महानगरों से बाहर भी प्रतिभा को अवसर मिलेगा और वैश्विक क्षमता केंद्रों को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि एकीकृत आईटी सेवाएं ढांचा और स्पष्ट कर व्यवस्था दीर्घकालिक स्थिरता और पारदर्शिता प्रदान करेगी, जिससे उद्योगों को भविष्य की योजना बनाने में सुविधा होगी।

