Thursday, February 19, 2026 |
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बजट सुधारों का तमिलनाडु के वस्त्र उद्योग ने किया स्वागत

कपास आयात शुल्क को निर्यात के लिए बताया बड़ा खतरा

by Business Remedies
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Tamil Nadu Textile Industry Workers And Cotton Processing Units

चेन्नई,

तमिलनाडु का वस्त्र उद्योग, जो भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात का एक प्रमुख आधार माना जाता है, ने केंद्रीय बजट में अवसंरचना, कौशल विकास और निर्यात प्रोत्साहन पर दिए गए जोर का स्वागत किया है। हालांकि उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क बनाए रखने से इन सुधारों का पूरा लाभ कमजोर पड़ सकता है। उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण कपास की समय पर उपलब्धता निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और रोजगार को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि कच्चे माल की लागत अधिक रहेगी तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी।

उद्योग से जुड़े हितधारकों ने नेशनल फाइबर स्कीम, मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना और समर्थ 2.0 जैसी पहलों की सराहना की है, जिनका उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र में कौशल तंत्र का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है। लेकिन उनका कहना है कि विनिर्माण और कौशल विकास में संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ कच्चे माल की लागत का तार्किक निर्धारण भी आवश्यक है, तभी उद्योग को वास्तविक लाभ मिलेगा। दक्षिण भारत मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दुरई पलानीसामी ने कहा कि कपास की सभी किस्मों पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटाना जरूरी है, ताकि गुणवत्तापूर्ण कपास की कमी दूर हो सके और निर्यात आदेश समय पर पूरे किए जा सकें। उन्होंने बताया कि घरेलू कपास की कीमतें पहले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक हो चुकी हैं और ब्राजील की कपास से करीब 15 प्रतिशत ज्यादा हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में यह मूल्य अंतर और बढ़ सकता है, जिससे पूरे वस्त्र मूल्य श्रृंखला की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ेगा। दुरई ने यह भी रेखांकित किया कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र लगभग 35 मिलियन लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है और यह भारत के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसमें तमिलनाडु की भूमिका सूत, कपड़ा और परिधान उत्पादन में अग्रणी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से पर्याप्त सुरक्षा मिलती है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। उनके अनुसार आयात से किसानों को कभी नुकसान नहीं हुआ है। भारत सीजन के दौरान 30 से 100 लाख गांठ कपास का निर्यात कर सकता है और ऑफ-सीजन में आयात कर संतुलित रणनीति अपना सकता है।

रीसाइकल्ड टेक्सटाइल फेडरेशन के अध्यक्ष एम. जयपाल ने भी इसी चिंता को दोहराते हुए कहा कि आयात शुल्क जारी रहने से उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा माल प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने जॉब-वर्क इकाइयों पर वस्तु एवं सेवा कर को 18 प्रतिशत पर बनाए रखने के निर्णय पर निराशा व्यक्त की और इसे पूरे वस्त्र मूल्य श्रृंखला के लिए झटका बताया। इस बीच निर्यातकों ने बजट में तरलता और व्यापार सुगमता पर दिए गए जोर का स्वागत किया है। परिधान निर्यात प्रोत्साहन परिषद के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने कहा कि सीमा शुल्क संबंधी सुधार और दस्तावेज प्रक्रिया को सरल बनाने से लेनदेन लागत घटेगी और परिचालन दक्षता में सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन कदमों के साथ कपास शुल्क की समीक्षा की जाए तो तमिलनाडु और भारत को विश्वसनीय वैश्विक वस्त्र आपूर्ति केंद्र के रूप में और मजबूती मिलेगी।



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