Tuesday, June 30, 2026 |
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वैश्विक तनाव के बीच Sensex और Nifty में साप्ताहिक गिरावट

by Business Remedies
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Share Market House shows weekly decline in Sensex and Nifty

मुंबई,

stock market update में भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह का समापन कमजोरी के साथ किया। वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया, जिससे प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty में गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह भर के कारोबार में Sensex और Nifty दोनों में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट रही। व्यापक बाजार भी दबाव में रहे और Nifty Midcap 100 तथा Smallcap 100 सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा, जबकि देश के सकल घरेलू उत्पाद के ताजा आंकड़ों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई थी। शुक्रवार को कारोबार के अंतिम दिन Sensex 961.42 अंक यानी 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 317.90 अंक यानी 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,178.65 पर बंद हुआ और 25,200 के स्तर से नीचे फिसल गया। अधिकांश क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव देखा गया, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी और मीडिया क्षेत्र के शेयर बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो वाहन, बैंकिंग, उपभोक्ता उत्पाद, धातु और रियल एस्टेट क्षेत्र के शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया और उपभोक्ता टिकाऊ उत्पाद क्षेत्र में कुछ मजबूती दिखाई दी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Nifty हाल के कारोबार दायरे से नीचे आ गया है, जो निकट अवधि में सुधारात्मक रुझान का संकेत देता है। 25,400 का स्तर अब निकटतम अवरोध के रूप में देखा जा रहा है, जबकि वैश्विक घटनाक्रम के चलते अस्थिरता बनी रह सकती है। Bank Nifty में भी मुनाफावसूली देखने को मिली और इसमें नकारात्मक पैटर्न बना। विशेषज्ञों के अनुसार 60,000 से 60,200 का दायरा निकटतम सहारा स्तर हो सकता है, जबकि अल्पकाल में 60,000 से 61,750 के व्यापक दायरे में कारोबार की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट विभाग के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि आने वाले सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार सतर्क रुख के साथ सीमित दायरे में चल सकते हैं। उनके अनुसार घरेलू वृद्धि रुझान और विभिन्न क्षेत्रों की मजबूती कुछ सहारा प्रदान कर सकती है, लेकिन संस्थागत निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वार्ता में ठोस नतीजा न निकल पाने से निवेशक भावना प्रभावित हुई है। हालांकि दोनों देशों ने अगले सप्ताह फिर से चर्चा की योजना का संकेत दिया है, लेकिन ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर संभावित प्रभाव को लेकर अनिश्चितता ने बाजार को दबाव में रखा हुआ है।



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