नई दिल्ली,
भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025–26 में मजबूत और स्थायी विस्तार की ओर बढ़ रही है। संशोधित अनुमान के अनुसार वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने का आकलन है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह प्रदर्शन देश की विकास गति को और सुदृढ़ करता है तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में ठोस आधार प्रदान करता है, जिसमें अधिक उत्पादकता, लचीलापन और समावेशी विकास शामिल है।
सरकार ने जीडीपी के आधार वर्ष को 2022–23 में संशोधित करने को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे तेजी से बदल रही अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय खातों को बेहतर ढंग से समायोजित किया जा सकेगा। नए श्रृंखला में बेहतर आंकड़ा स्रोतों को जोड़ा गया है, कार्यप्रणाली को सशक्त किया गया है, उभरते क्षेत्रों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है तथा आपूर्ति और उपयोग तालिका ढांचे के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाई गई है। इससे आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक, संगत और व्यापक आकलन संभव होगा। बयान में कहा गया है कि भारत की सांख्यिकीय प्रणाली अब अधिक सटीकता, तुलनात्मकता और वैश्विक मानकों के अनुरूपता की दिशा में आगे बढ़ रही है। इन प्रयासों से आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता मजबूत होती है और नीतिगत निर्णयों तथा सतत आर्थिक योजना निर्माण के लिए ठोस आधार तैयार होता है।
भारत अपने जीडीपी अनुमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य 2008 राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के अनुरूप तैयार करता है। संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग द्वारा प्रस्तावित 2025 की नई प्रणाली को विश्व स्तर पर वर्ष 2029–30 के आसपास अपनाए जाने की संभावना है। भारत भी अगले आधार वर्ष संशोधन के दौरान अद्यतन मानकों के साथ तालमेल स्थापित करने की योजना बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विशेष आंकड़ा प्रसार मानक का सदस्य होने के कारण भारत वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्ता और पारदर्शिता मानकों का पालन करता है। संशोधित जीडीपी श्रृंखला भी अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप है।
जीडीपी का आधार वर्ष 2022–23, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2024 तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का आधार वर्ष 2022–23 किए जाने के साथ देश की सांख्यिकीय प्रणाली व्यापक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से गुजर रही है। इसी क्रम में थोक मूल्य सूचकांक के आधार वर्ष में संशोधन की प्रक्रिया भी जारी है। जब तक नया थोक मूल्य सूचकांक उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान सूचकांक का ही उपयोग मूल्य समायोजन के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय निकट भविष्य में उत्पादक मूल्य सूचकांक को भी शामिल करने की योजना बना रहा है। यह सूचकांक उत्पादकों द्वारा खरीदी और बेची जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों

