Tuesday, June 30, 2026 |
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते के तहत पांच वर्ष तक एक-दूसरे को MFN दर्जा देने पर सहमति

by Business Remedies
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Representational image of the agreement on the free trade agreement between India and the European Union

मुंबई,

भारत और यूरोपीय संघ ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद पांच वर्ष तक एक-दूसरे को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ यानी एमएफएन का दर्जा देने पर सहमति व्यक्त की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच सेवा व्यापार में निष्पक्ष और समान व्यवहार सुनिश्चित करना है।

एमएफएन प्रावधान के तहत भारत और यूरोपीय संघ के सेवा क्षेत्र तथा सेवा प्रदाताओं को कम से कम उतना ही अनुकूल व्यवहार दिया जाएगा, जितना किसी अन्य देश को दिया जाता है। इसका अर्थ यह है कि कोई भी पक्ष किसी तीसरे देश को बेहतर सुविधा नहीं दे सकेगा, जब तक वह समान लाभ दूसरे पक्ष को भी न दे, हालांकि यह कुछ शर्तों और सीमाओं के अधीन रहेगा। हालांकि यह प्रावधान कर संधियों, मानकों या प्राधिकरणों की पारस्परिक मान्यता और विवाद निपटान प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर लागू नहीं होगा। इन क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। समझौते में यह भी प्रावधान किया गया है कि दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उत्पादित और उपभोग की जाने वाली सेवाओं के लिए विशेष लाभ दे सकते हैं। इससे सीमाई क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यह प्रावधान मुक्त व्यापार समझौते के सेवा व्यापार अध्याय का हिस्सा है, जिसका पाठ 27 जनवरी को सार्वजनिक किया गया था। इस अध्याय में सेवा क्षेत्र में बाजार पहुंच, पारदर्शिता और नियामकीय सहयोग से जुड़े कई बिंदु शामिल हैं। इस व्यवस्था के तहत एक संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा, जो समझौते के चौथे वर्ष में इसकी समीक्षा करेगी। समीक्षा के दौरान यूरोपीय संघ में भारतीय विद्यार्थियों के प्रवेश और ठहराव से जुड़े मुद्दों, उनके कार्य करने के अधिकार तथा सेवा प्रदाताओं की अस्थायी आवाजाही से संबंधित नियमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समीक्षा के आधार पर संयुक्त समिति यह तय करेगी कि प्रारंभिक पांच वर्ष की अवधि के बाद एमएफएन व्यवस्था को जारी रखा जाए या नहीं। यदि परिस्थितियां किसी पक्ष के हितों को प्रभावित करती हैं, तो वह भी समीक्षा का अनुरोध कर सकता है। यदि समिति इस व्यवस्था को आगे न बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो एमएफएन का दायित्व समाप्त हो जाएगा, हालांकि पहले से दिए गए लाभ यथावत रहेंगे। भारत और यूरोपीय संघ ने पिछले माह लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनाई थी। इस समझौते का उद्देश्य शुल्कों में कमी लाना, बाजार पहुंच को बेहतर बनाना और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सेवा क्षेत्र, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं में नए अवसर खुल सकते हैं।



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