Friday, July 10, 2026 |
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अनंत उपकार करने वाले ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त का दिन आज

by Business Remedies
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punit jain

गणेश चतुर्थी के दूसरे दिन ऋषि पंचमी आज भारत वर्ष में मनाई जाएगी। ऋषि पंचमी का दिन वेददिन माना जाता है। इस दिन का महत्व यह है कि जिन प्राचीन ऋषियों ने अपने संपूर्ण जीवन का त्याग कर वेदों जैसे अमर वाड्मय निर्माण किया, उनके प्रति ऋणी रहकर कृतज्ञता के साथ स्मरण किया जाए। ऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ सप्तर्षि हैं। ऋषि या मुनि शब्द सुनते ही हमारे हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं और हमारा सिर सम्मान व आदर से झुक जाता है। इस भारत खंड में अनेक ऋषियों ने विभिन्न योग विधियों के अनुसार साधना करके भारत को तपोभूमि बनाया है। उन्होंने धर्म और अध्यात्म पर विस्तार से लिखा है और समाज में धर्माचरण और साधना का प्रसार कर समाज को सभ्य बनाया है। यह माना जाता है कि आज का मनुष्य प्राचीन काल के विभिन्न ऋषियों का वंशज है, लेकिन चूंकि मनुष्य यह भूल गया है, इसलिए वह ऋषियों के आध्यात्मिक महत्व को नहीं जानता है। साधना करने से ही ऋषियों के महत्व और शक्ति को समझा जा सकता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। मनुष्य के समग्र कल्याण के लिए अपना जीवन व्यतीत करने वाले ऋषियों के चरणों में प्रणाम। अपने तपोबल से विश्व में मानव पर अनंत उपकार करने वाले, मानव जीवन को सही दिशा दिखाने वाले ऋषियों को इस दिन याद किया जाता है। ऋषि पंचमी के दिन जानवरों की मदद से बना अनाज नहीं खाना चाहिए। जब मासिक धर्म बंद हो जाता है तो महिलाएं अपना ऋषि ऋण चुकाने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत रखती हैं। मुख्य रूप से यह व्रत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान लगने वाले रजस्वला दोष से बचाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के पाप तो नष्ट होते हैं, साथ ही सप्तऋषियों का आशीर्वाद भी मिलता है।



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