Monday, August 3, 2026 |
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AI के बढ़ते कदम में कई चुनौतियां भी है सामने

by Business Remedies
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भारत में एआई का विकास पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। वर्ष, 2026 तक भारत दुनिया के सबसे बड़े एआई बाजारों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम बाकी है। भारत अभी एआई बिल्डिंग फेज में है। फाउंडेशन बन चुका है, अब स्केल-अप चल रहा है। पर इन सबके बावजूद चुनौतियां भी है। इनका समाधान कर ही इस ओर आगे बढ़ पाएंगे। भारत में उच्च क्षमता वाले जीपीयू और कंप्यूटिंग संसाधनों की कमी है। उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय भाषा डेटा का अभाव है और एआई शोध पर अपेक्षाकृत कम निवेश किया जा रहा है। वैसे तो केंद्र सरकार भी एआई को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, न्याय और प्रशासन में एआई का उपयोग बढ़ रहा है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी एआई आधारित सेवाओं के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। वहीं भारत में हजारों एआई स्टार्टअप सक्रिय हुए हैं, इनमें जनरेटिव एआई, हेल्थटेक, एग्रीटेक, फिनटेक और एडटेक में तेजी से नवाचार हो रहा है। कई भारतीय कंपनियां वैश्विक ग्राहकों के लिए एआई समाधान बना रही हैं। इसके अलावा आईटी कंपनियां और बड़ी टेक कंपनियां एआई में भारी निवेश कर रही हैं। बैंकिंग, बीमा, मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स में एआई का व्यापक उपयोग लगातार बढ़ रहा है। आईआईटी, आईआईएससी और अन्य विश्वविद्यालयों में एआई पर शोध बढ़ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों छात्र एआई और मशीन लर्निंग सीख रहे हैं। भारत ने 2 साल में शून्य से 38,000 जीपीयू तक का सफर किया है। अब हम एआई उपभोक्ता से एआई क्रिएटर बनने की राह पर हैं। पूरी तरह से एआई क्रिएटर बनने में फिलहाल तीन से चार वर्ष लग जाएंगे।



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