अहिंसा के प्रतीक और दुनियाभर में बापू नाम से पुकारे जाने वाले महात्मा गांधी का जन्मदिन आज मनाया जाएगा। अहिंसा की नीति के जरिए विश्वभर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए उनके जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया। इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया गया। महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज्यादा देशों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। महात्मा गांधी के विचारों में सबसे ताकतवर था अहिंसा का विचार। इसे दुनिया के कई देशों में क्रांति और विरोध का हथियार बनाया गया। 15 जून, 2007 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने प्रस्ताव पारित कर 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया। गांधी का पढ़ाया गया अहिंसा का पाठ आज भी पूरी दुनिया में सम्मान के साथ याद किया जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने सत्य और अहिंसा के आदर्शों पर चलकर भारत को गुलामी की बेडिय़ों से मुक्त कराया था। गांधी जयंती के रूप में उनके जन्मदिन मनाकर देश राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। आज के विद्यार्थी एवं युवा पीढ़ी बापू के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं तथा देश हित के लिए अपना योगदान दें। इसी उद्देश्य को लेकर गांधी जयंती का आयोजन किया जाना चाहिए, तभी सही मायने में सार्थकता है। गांधी जयंती को हर भारतवासी को उल्लास से मनाना चाहिए।

