Friday, August 7, 2026 |
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वास्तु की बदलती सोच: विज्ञान, आध्यात्म और सफलता पर श्री रक्षित सिंघल से विशेष बातचीत

by Business Remedies
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चारु भाटिया | जयपुर 

एमएनआईटी, जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद ब्रह्मज्ञान ब्रांड की स्थापना तक का श्री रक्षित सिंघल का सफर पारंपरिक करियर से बिल्कुल अलग रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जोड़ते हुए एक ऐसी संस्था खड़ी की है, जिसका उद्देश्य वास्तु, ऑकल्ट साइंस और अध्यात्म के क्षेत्र में शोध, प्रामाणिकता और पेशेवर दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपने प्रेरणादायक सफर, चुनौतियों, वास्तु को लेकर लोगों की धारणाओं और भारत के एक विश्वसनीय आध्यात्मिक ब्रांड के निर्माण के अपने विज़न पर विस्तार से चर्चा की।

प्रश्न: आप ब्रह्मज्ञान ब्रांड और ब्रह्मज्ञान  इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक हैं। आपका अब तक का सफर कैसा रहा और इस अलग क्षेत्र को चुनने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

उत्तर: मेरी शैक्षणिक यात्रा इंजीनियरिंग से शुरू हुई। मैंने मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और इसके बाद भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद से प्रबंधन की पढ़ाई की। यदि पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मेरा करियर सामान्य नहीं लगता, लेकिन जीवन का हर चरण मुझे आज की मंजिल तक लेकर आया। कॉलेज के दिनों में मैं भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुज़रा। तनाव और अवसाद जैसी परिस्थितियों ने मुझे आध्यात्म की ओर आकर्षित किया। शुरुआत में यह मेरे लिए मानसिक शांति का माध्यम था, लेकिन धीरेधीरे मुझे समझ आया कि अध्यात्म केवल आस्था या अनुष्ठान नहीं, बल्कि अनुभव और अभ्यास का विषय है।

जैसेजैसे मैंने अध्ययन किया, मुझे विज्ञान और अध्यात्म के बीच गहरा संबंध दिखाई देने लगा। क्वांटम फिजिक्स के कई सिद्धांत हमारे प्राचीन आध्यात्मिक ग्रंथों में वर्णित विचारों से मेल खाते हैं। इसी ने मुझे ऑकल्ट साइंस का गंभीर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद मैंने ब्रह्मज्ञान इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की, जिसके अंतर्गत ब्रह्मज्ञान ब्रांड की शुरुआत हुई। आज हमारा कार्य तीन प्रमुख स्तंभोंअध्यात्म, ऑकल्ट साइंस और धर्मपर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल सामान्य परामर्श देना नहीं, बल्कि शोध आधारित, व्यक्तिगत और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

कंसल्टेंसी के अलावा हमने प्राकृतिक पत्थर, ब्रेसलेट, अगरबत्ती और अन्य धार्मिक उत्पादों का भी एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार किया है। साथ ही आध्यात्मिक रिट्रीट, साउंड हीलिंग, ऑरा क्लीनिंग, कथा वाचन, भजन जैमिंग और स्पिरिचुअल टूरिज्म जैसी गतिविधियाँ भी संचालित करते हैं। विशेष बात यह है कि इन कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

प्रश्न: इतने विशिष्ट क्षेत्र में कंपनी स्थापित करना आसान नहीं रहा होगा। सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या थीं?

उत्तर: मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि आध्यात्मिक ज्ञान के लिए एक सच्चे गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। इस क्षेत्र का ज्ञान केवल पुस्तकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए वर्षों का अभ्यास, अनुशासन और सही मार्गदर्शन आवश्यक होता है।

मैं हमेशा से सनातन धर्म और उसकी ज्ञान परंपरा से प्रभावित रहा हूँ। हमारे वैदिक ग्रंथों में अपार ज्ञान मौजूद है, लेकिन उसकी सही व्याख्या और समझ सबसे बड़ी चुनौती है। यही कार्य एक अनुभवी गुरु कर सकता है।

दूसरी चुनौती इस क्षेत्र की छवि रही है। दुर्भाग्य से कई लोगों ने आध्यात्म को केवल व्यवसाय बना दिया है। हमारा उद्देश्य हमेशा प्रामाणिकता, पारदर्शिता और गुणवत्ता पर आधारित संस्था बनाना रहा है।

भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप के रूप में मान्यता मिलने से हमारी विश्वसनीयता बढ़ी है, लेकिन हमारा मूल उद्देश्य आज भी वही हैहर व्यक्ति को ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ सेवा देना।

प्रश्न: वास्तु को लेकर लोगों की सबसे बड़ी गलतफहमियाँ क्या हैं?

उत्तर: सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि वास्तु सभी लोगों के लिए एक जैसा होता है। वास्तव में हर व्यक्ति की ऊर्जा अलग होती है, इसलिए वास्तु सलाह भी व्यक्तिगत होनी चाहिए।

उदाहरण के लिए, लोग मानते हैं कि दक्षिणमुखी मकान हमेशा अशुभ होता है, जबकि कुछ लोगों की कुंडली और ऊर्जा संतुलन के अनुसार वही दिशा उनके लिए लाभकारी हो सकती है।

वास्तु क्षेत्र अभी भी काफी असंगठित है। विश्वसनीय ब्रांडों की कमी के कारण लोग सही मार्गदर्शन नहीं प्राप्त कर पाते। चूँकि वास्तु ऊर्जा पर आधारित विषय है और इसके परिणाम हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते, इसलिए गलत सलाह मिलने पर लोगों का विश्वास पूरे विषय से उठ जाता है।

मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में जवाबदेही और पेशेवर व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न: पिछले कुछ वर्षों में वास्तु परामर्श की मांग में किस तरह का बदलाव आया है?

उत्तर: पिछले कुछ वर्षों में जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब लोग वास्तु, ज्योतिष और अंकशास्त्र जैसी विधाओं को अंधविश्वास नहीं, बल्कि व्यवस्थित ज्ञान के रूप में देखने लगे हैं।

विशेषकर जेनज़ी पीढ़ी आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति अधिक उत्सुक है। भजन जैमिंग, मेडिटेशन और स्पिरिचुअल रिट्रीट जैसे कार्यक्रम तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

आज की प्रतिस्पर्धी जीवनशैली में लोग मानसिक संतुलन, बेहतर निर्णय क्षमता और एकाग्रता के लिए ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

प्रश्न: आधुनिक कार्यालयों और व्यावसायिक परिसरों के निर्माण में किन वास्तु सिद्धांतों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: कार्यस्थल का वास्तु केवल सुंदरता तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण बनाना है जो उत्पादकता, रचनात्मकता और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए।

हालाँकि प्रत्येक व्यवसाय के अनुसार सुझाव अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, हीलिंग और वेलनेस से जुड़े संस्थानों के लिए उत्तर और उत्तरपूर्व दिशा को मजबूत रखना लाभकारी माना जाता है, जबकि नेटवर्किंग और संचार आधारित व्यवसायों के लिए पूर्व दिशा महत्वपूर्ण होती है।

कुछ सामान्य सिद्धांत भी हैं, जैसे उत्तरपूर्व में रसोई नहीं होनी चाहिए और पूरे परिसर में ऊर्जा का संतुलित प्रवाह बना रहना चाहिए।

वास्तु को तीन स्तरों पर समझा जा सकता हैबेसिक वास्तु, वैदिक वास्तु और एस्ट्रो वास्तु। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार जब 45 वास्तु देवताओं की ऊर्जा संतुलित होती है, तभी वास्तु का सर्वोत्तम प्रभाव प्राप्त होता है।

प्रश्न: संपत्ति खरीदने से पहले लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: सबसे पहले व्यक्ति की कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है, जिससे यह समझा जा सके कि उसके लिए कौनसी दिशा उपयुक्त होगी।

इसके अलावा घर की समग्र ऊर्जा का भी मूल्यांकन होना चाहिए। वास्तु के अनुसार प्रत्येक भवन में सत्त्व, रजस और तमस तीनों गुण अलगअलग अनुपात में मौजूद होते हैं, जो मानसिक शांति, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।

व्यावहारिक रूप से घर के केंद्र में खंभा नहीं होना चाहिए, उत्तरपूर्व दिशा में रसोई और शौचालय से बचना चाहिए तथा घर का डिज़ाइन सकारात्मक ऊर्जा के सहज प्रवाह को सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए।

प्रश्न: तकनीक ने वास्तु परामर्श के क्षेत्र को किस प्रकार बदला है?

उत्तर: तकनीक ने वास्तु परामर्श को पहले से कहीं अधिक सटीक बना दिया है।

दिशा निर्धारण वास्तु का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है और आज Google Maps जैसे डिजिटल उपकरण कुछ डिग्री की सटीकता के साथ दिशा निर्धारित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा फ्लोर प्लान का विश्लेषण, विस्तृत लेआउट तैयार करना और ऑनलाइन परामर्श भी तकनीक के कारण आसान हो गया है।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि युवा पीढ़ी वास्तु को पहले की पीढ़ियों से अलग नजरिए से देखती है?

उत्तर: बिल्कुल। पहले लोग परंपराओं का सम्मान तो करते थे, लेकिन सक्रिय रूप से वास्तु परामर्श नहीं लेते थे। जबकि हमारे कई प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक भवन वास्तु सिद्धांतों के अनुसार ही बनाए गए हैं।

आज की युवा पीढ़ी अधिक जिज्ञासु है। वे जानकारी जुटाती है, सवाल पूछती है और यदि उन्हें मूल्य दिखाई देता है तो परामर्श लेने में भी संकोच नहीं करती।

प्रश्न: आने वाले दशक में वास्तु के कौनसे नए रुझान देखने को मिलेंगे?

उत्तर: भविष्य व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) वास्तु का होगा। अब लोग सामान्य उपायों के बजाय अपनी विशेष समस्याओंजैसे संबंध, स्वास्थ्य, करियर और ऊर्जा संतुलनके अनुरूप समाधान चाहते हैं।

कुंडली, व्यक्तिगत परिस्थितियों और वातावरण के आधार पर तैयार किए गए समाधान आने वाले समय में अधिक लोकप्रिय होंगे।

प्रश्न: ब्रह्मज्ञान के लिए आपका दीर्घकालिक विज़न क्या है?

उत्तर: हमारा लक्ष्य ब्रह्मज्ञान को भारत का सबसे विश्वसनीय और पेशेवर वास्तु ब्रांड बनाना है और भविष्य में इसे वैश्विक स्तर तक पहुँचाना है।

हम इस क्षेत्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानक स्थापित करना चाहते हैं। आज भी हमारी अधिकांश वृद्धि लोगों की सिफारिशों के माध्यम से होती है, जो हमारे प्रति उनके विश्वास को दर्शाती है। हमारा उद्देश्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि एक ऐसी संस्था का निर्माण करना है जो लंबे समय तक ईमानदारी और प्रामाणिकता के साथ सेवा देती रहे।

प्रश्न: ऑकल्ट साइंस में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को आप क्या सलाह देंगे?

उत्तर: सबसे पहली सलाह यही है कि एक सच्चे गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करें। आध्यात्मिक ज्ञान रातोंरात नहीं मिलता। इसके लिए धैर्य, अनुशासन और वर्षों का अभ्यास आवश्यक है।

दूसरी बात, जो सीखें उसे पहले अपने जीवन में लागू करें। व्यक्तिगत अनुभव ही आपके ज्ञान को विश्वसनीय बनाता है।

मैं युवाओं को यह भी सलाह दूँगा कि वे हर विषय में थोड़ाथोड़ा जानने के बजाय किसी एक क्षेत्रजैसे वास्तु, ज्योतिष या अंकशास्त्रमें गहरी विशेषज्ञता विकसित करें। अंततः इस क्षेत्र में सफलता केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि ईमानदारी, विनम्रता और निरंतर सीखने की भावना से मिलती है।



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