Thursday, September 17, 2026 |
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“वैश्विक कमोडिटी कारोबार में भरोसा ही असली मुद्रा है”: फुल सर्किल कमोडिटीज के निर्माण पर कुणाल करण पारख

by Business Remedies
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Full Circle Commodities Founder Kunal Karan Parakh discussing global commodity trading

चारु भाटिया| जयपुर कृषि जिंसों से लेकर कीमती धातुओं तक, वैश्विक कारोबार मांग, आपूर्ति, मौसम, भू-राजनीति, नियमों और बाजार की धारणा जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है। ऐसे माहौल में एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, जो अलग-अलग देशों के खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ने के साथ ही उन्हें अनिश्चितताओं से निपटने और आपसी विश्वास कायम करने में मदद कर सके। जयपुर, राजस्थान स्थित फुल सर्किल कमोडिटीज (FCC) एक वैश्विक कृषि कमोडिटी इंडेंटिंग फर्म है, जो अंतरराष्ट्रीय और भारतीय बाजारों में ग्राहकों के लिए ट्रेड एजेंट और मध्यस्थ के रूप में काम करती है। कंपनी 30 से अधिक कमोडिटीज में कारोबार करती है, जिनमें अनाज, दालें, तिलहन, वनस्पति तेल, कॉफी, कच्चा काजू और कीमती धातुएं शामिल हैं।

कंपनी के फाउंडर और सीईओ श्री कुणाल करण पारख का कमोडिटी बाजार से जुड़ाव उनके छात्र जीवन से शुरू हुआ, जब एक प्रोफेसर ने उन्हें कमोडिटी मार्केट से परिचित कराया। यही रुचि आगे चलकर उनके करियर का आधार बनी। एमबीए और प्रमाणित एफआरएम प्रोफेशनल कुणाल करण पारख ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स और अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार में लंबे समय तक काम किया है। वे सेक्टर के विकास, भू-राजनीतिक चुनौतियों, तकनीक, अनुपालन, वैश्विक कृषि बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका और खाद्य कारोबार में ट्रेसेबिलिटी के महत्व पर चर्चा करते हैं।

प्रश्न: आप फुल सर्किल कमोडिटीज के फाउंडर हैं। कंपनी किस क्षेत्र में काम करती है और इस क्षेत्र में आपकी यात्रा कैसे शुरू हुई?

उत्तर: मैं कहूंगा कि इस कारोबार और इसके पीछे की सोच की शुरुआत इस विचार से हुई कि आप कमोडिटीज को नहीं चुनते, बल्कि कमोडिटीज आपको चुनती हैं और किसी न किसी तरह आपके जीवन का हिस्सा बन जाती हैं।2003 में फाइनेंस की पढ़ाई के दौरान मेरे प्रोफेसर ने मुझे कमोडिटी मार्केट की अवधारणा से परिचित कराया और मैं इससे काफी प्रभावित हुआ। 2004 में मैंने ट्रेडस्विफ्ट में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में काम शुरू किया। मेरे करियर का वास्तविक टर्निंग पॉइंट तब आया, जब मैंने कोटक के कमोडिटी डेरिवेटिव्स डेस्क को जॉइन किया और वहां 11 साल बिताए। इसी दौरान मुझे वैश्विक स्तर पर सीखने और इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल करने का अवसर मिला।

भारत में कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार का इतिहास भी दिलचस्प है। 1965 में मोरारजी देसाई सरकार के दौरान कमोडिटी ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और इसे 2003 में दोबारा खोला गया। इसलिए जब मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा, तब यह बाजार अभी विकसित हो रहा था। आज फुल सर्किल कमोडिटीज जयपुर स्थित एक वैश्विक कृषि कमोडिटी इंडेंटिंग फर्म है। मैं इसका फाउंडर और सीईओ हूं। हम ट्रेड एजेंट और मध्यस्थ के रूप में काम करते हैं और ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय तथा भारतीय बाजारों में कृषि जिंसों की सोर्सिंग और ट्रेडिंग में मदद करते हैं।

हम 30 से अधिक कमोडिटीज में काम करते हैं, जिनमें गेहूं, मक्का, जौ, ज्वार, मसूर, चना, अरहर, तिलहन, वनस्पति तेल, कॉफी, कच्चा काजू और कीमती धातुएं शामिल हैं भारत अपनी दालों की जरूरत का एक हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। हम ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा तथा रूस जैसे देशों से कृषि जिंसों का निर्यात करने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ काम करते हैं, जबकि भारत, चीन और अन्य दक्षिण एशियाई बाजार प्रमुख गंतव्य हैं। हमारी भूमिका मूल रूप से आयातकों और निर्यातकों के बीच भरोसेमंद कारोबारी संपर्क स्थापित करना है।

प्रश्न: कमोडिटी बाजार में प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?

उत्तर: यह बेहद अस्थिर बाजार है। कीमतें मौसम, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार नीतियों सहित कई कारकों के आधार पर बदल सकती हैं। एक अन्य चुनौती दुनिया के कुछ हिस्सों, खासकर कम विकसित देशों में कारोबार के पूरी तरह औपचारिक ढांचे का अभाव है। अलग-अलग देशों के दो पक्षों के बीच तुरंत भरोसा कायम होना आसान नहीं होता। ऐसे में हमारी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। हम सही कारोबारी सहयोगियों का परिचय कराते हैं और किसी लेन-देन से पहले दोनों पक्षों के बीच विश्वास का आधार तैयार करने में मदद करते हैं।

प्रश्न: फुल सर्किल कमोडिटीज खुद को अन्य कमोडिटी ट्रेडिंग या इंडेंटिंग कंपनियों से अलग कैसे रखती है?

उत्तर: मुझे लगता है कि अंतर हमारे काम करने के तरीके में मौजूद नवाचार और संरचना में है। किसी निष्कर्ष पर जल्द पहुंचने या तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय हम वास्तविक बाजार परिस्थितियों को समझने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, मार्च में अल नीनो के कृषि उत्पादन और व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर कई अनुमान लगाए गए थे। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव काफी बाद में सामने आया। FCC ने केवल अनुमानों का अनुसरण करने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों को समझने पर ध्यान दिया। हमने अपने ग्राहकों को जून के अंत से खरीद शुरू करने की सलाह दी और उन्हें कच्चे माल की बेहतर कीमत पर सोर्सिंग में मदद की।

इस क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा अनुमान लगाना भी नुकसानदायक हो सकता है। हमारा ध्यान खरीदारों और विक्रेताओं दोनों को बेहतर सहायता देने पर रहता है। हमारे बिजनेस मॉडल में भी एक महत्वपूर्ण अंतर है। कई कंपनियां समय के साथ इंडेंटिंग से खुद ट्रेडिंग ऑपरेशन की ओर बढ़ जाती हैं। हमने इंडेंटिंग कंपनी बने रहने की प्रतिबद्धता कायम रखी है। हमारा उद्देश्य खरीदारों और विक्रेताओं के लिए लेन देन को आसान बनाना और मूल्य प्रदान करना है, न कि खुद एक प्रतिस्पर्धी ट्रेडर बनना।

प्रश्न: वैश्विक कृषि कमोडिटी बाजार में भारत की स्थिति को आप किस तरह देखते हैं?

उत्तर: भारत का उपभोक्ता बाजार बहुत बड़ा है और इससे काफी बड़ी मांग पैदा होती है। चीन के साथ भारत भी वैश्विक कमोडिटी बाजारों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत वैश्विक कृषि कमोडिटी बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। भारत की मांग कीमतों को प्रभावित कर सकती है और यह तय कर सकती है कि कमोडिटीज का कारोबार कहां और किस तरह होगा  साथ ही भारत कई कृषि उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात भी करता है। इससे मांग और आपूर्ति, दोनों पक्षों पर देश की महत्वपूर्ण भूमिका बनती है। यही कारण है कि भारत वैश्विक कमोडिटी कारोबारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है।

प्रश्न: कृषि कमोडिटी बाजार में तकनीक की भूमिका को आप किस तरह देखते हैं?

उत्तर: आज की आपस में जुड़ी और तकनीक आधारित दुनिया में सूचनाएं अभूतपूर्व गति से फैलती हैं और ट्रेडर्स तथा इंडेंटर्स के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, तकनीक ने इंडेंटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है। जब सूचनाएं इतनी तेजी से उपलब्ध होती हैं, तो उनकी प्रामाणिकता और विश्वसनीयता की जांच करना और उसके बाद कार्रवाई का सही समय तय करना जरूरी हो जाता है। तकनीक जानकारी तक पहुंच दे सकती है, लेकिन जानकारी का सत्यापन आवश्यक है। इसलिए इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स के लिए तकनीकी बदलावों के बारे में लगातार सीखते रहना और उनका प्रभावी उपयोग समझना जरूरी है।

प्रश्न: कृषि कमोडिटी ट्रेडिंग में कौनसा बड़ा बदलाव आपको उभरता हुआ दिखाई दे रहा है?

उत्तर: अधिकांश बढ़ते हुए सेक्टर अलग-अलग दौर में बदलते हैं। 1965 से 1975 के बीच स्टील, ऑटोमोबाइल और सीमेंट जैसे उद्योगों की मांग प्रमुख थी। बाद में टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं महत्वपूर्ण बनीं। तकनीक के विकास के साथ मोबाइल फोन और इंटरनेट बड़े ग्रोथ सेक्टर बनकर सामने आए। कृषि कमोडिटीज में मुझे लगता है कि अगला बड़ा मुद्दा खाद्य मिलावट और उत्पादों की प्रामाणिकता होगा। खाद्य उद्योग में अगला विकास चरण उन संगठनों के पास होगा, जो अपने उत्पादों के बारे में प्रमाणिक और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध करा सकें।

ट्रेसेबिलिटी गेम चेंजर साबित होने वाली है। खरीदार तेजी से यह जानना चाहते हैं कि उत्पाद कहां से आया है, उसे कैसे संभाला गया, उसमें किसी तरह की मिलावट तो नहीं है और उसकी गुणवत्ता को सत्यापित किया जा सकता है या नहीं। जो व्यवसाय विश्वसनीय जानकारी और पारदर्शिता उपलब्ध करा पाएंगे, वही सफलता हासिल करेंगे।

प्रश्न: कृषि और धातु कमोडिटीज की ट्रेडिंग में क्या अंतर है?

उत्तर: दोनों की प्रक्रियाएं काफी अलग हैं। मेटल ट्रेडिंग में प्रक्रिया आमतौर पर तेज होती है और खरीदार को उत्पाद अपेक्षाकृत जल्दी मिल सकता है इसके विपरीत कृषि कमोडिटी को खरीदार तक पहुंचने में कई महीने लग सकते हैं। शिपमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और कॉन्ट्रैक्ट के निष्पादन सहित हर चरण में काफी समय लग सकता है। कीमत का जोखिम भी काफी अधिक होता है, क्योंकि कृषि कमोडिटीज मौसम और अन्य बाहरी कारकों से प्रभावित होती हैं। इसके विपरीत धातुओं में कीमत के जोखिम को संभालने के लिए अपेक्षाकृत स्थापित हेजिंग व्यवस्था मौजूद नहीं है। फसल की आवश्यक गुणवत्ता बनाए रखना भी एक चुनौती है, क्योंकि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता कई कारकों पर निर्भर करती है।

धातुएं अपनी भौतिक विशेषताओं के मामले में तुलनात्मक रूप से स्थिर होती हैं। कृषि कमोडिटीज अधिक गतिशील होती हैं, क्योंकि उत्पाद खुद प्रकृति और उसके उत्पादन, भंडारण तथा परिवहन की परिस्थितियों से प्रभावित होता है।

प्रश्न: कीमती धातुओं के क्षेत्र में आप वास्तव में क्या काम करते हैं?

उत्तर: हम निवेशकों को कैश एंड कैरी आर्बिट्राज ट्रेड में प्रवेश करने में मदद करते हैं। हम भारत में विश्वसनीय बाजार प्रतिभागियों के बीच धातुओं की सोर्सिंग करते हैं और बाद में उनकी बिक्री में सहायता करते हैं।

प्रश्न: फुल सर्किल कमोडिटीज के विस्तार को लेकर आपकी भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

उत्तर: भारत के अलावा हमारे प्रतिनिधि कार्यालय वियतनाम, इंडोनेशिया, तंजानिया और पश्चिमी अफ्रीका में हैं। हम दक्षिण अमेरिका और चीन सहित अन्य देशों में भी रजिस्टर्ड ऑफिस स्थापित करना चाहते हैं हमारा व्यापक उद्देश्य ग्राहकों को सर्वोत्तम संभव सेवा देना और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेडिंग को उनके लिए कम तनावपूर्ण बनाना है। हम चाहते हैं कि खरीदार और विक्रेता पूरे विश्वास के साथ कारोबार कर सकें और उन्हें भरोसा हो कि सामने वाला पक्ष विश्वसनीय है तथा उनके कारोबारी संबंधों को एक भरोसेमंद मध्यस्थ सहयोग प्रदान कर रहा है।



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