Friday, July 10, 2026 |
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व तनाव से बाजार पर दबाव, अगले सप्ताह भी रह सकता है असर

by Business Remedies
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Falling Indian stock market indicators and rising crude oil prices

Mumbai,

भारतीय stock market ने बीते सप्ताह कमजोर प्रदर्शन किया और लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में कमजोरी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की भावना को प्रभावित किया, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये वैश्विक कारक आने वाले सप्ताह में भी बाजार की दिशा तय करेंगे और उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

शुक्रवार (March 27) को प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty दोनों में तेज गिरावट देखी गई। Sensex 1,690 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 487 अंक यानी 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, यदि Nifty 22,700–22,500 के स्तर से नीचे मजबूती से टूटता है, तो बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। इससे सूचकांक 22,000–21,744 के दायरे तक जा सकता है, जो 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। वहीं ऊपर की ओर 23,000–23,100 का स्तर तत्काल बाधा के रूप में काम करेगा, जबकि 23,300–23,500 का दायरा मजबूत आपूर्ति क्षेत्र माना जा रहा है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव

केवल प्रमुख सूचकांक ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की समग्र स्थिति कमजोर बनी रही। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो संघर्ष शुरू होने के बाद से तेज उछाल को दर्शाता है। भारत जैसे देश, जो तेल आयात पर काफी निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति महंगाई बढ़ाने और व्यापार घाटा बढ़ाने का कारण बन सकती है।

रुपये में कमजोरी और सुरक्षित निवेश की मांग

भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर के पार चला गया। इससे विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी है। दूसरी ओर, अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। सोना और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त देखी गई और शुक्रवार को दोनों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में दबाव बना रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और वैश्विक संकेतों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।



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