31 March date को गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3,300 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित सेमीकंडक्टर चिप परीक्षण और पैकेजिंग इकाई का उद्घाटन किया जाएगा, जिससे भारत की सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृत की गई थी और इसे केयन्स सेमिकॉन द्वारा विकसित किया जा रहा है। साणंद, जो पहले एक प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माण केंद्र के रूप में जाना जाता था, अब तेजी से उन्नत प्रौद्योगिकी उद्योगों का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
इस नई इकाई में सेमीकंडक्टर चिप्स की परीक्षण और पैकेजिंग की जाएगी, जो उत्पादन प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है। संयंत्र की अनुमानित उत्पादन क्षमता प्रतिदिन लगभग 60 लाख चिप्स की होगी, जिससे देश की इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उद्योगों को बड़ा समर्थन मिलेगा। इससे पहले 28 February date को माइक्रोन द्वारा भी एक सेमीकंडक्टर इकाई का उद्घाटन किया गया था, और अब केयन्स सेमिकॉन तथा अन्य कंपनियों की परियोजनाओं के साथ साणंद क्षेत्र में एक मजबूत औद्योगिक समूह विकसित हो रहा है। गुजरात सरकार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, राज्य को सेमीकंडक्टर निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस नई इकाई के जुड़ने से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उन्नत निर्माण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र में हो रही तेज प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने बहुत कम समय में ऐसे कार्य पूरे किए हैं, जिनमें अन्य विकसित देशों को कई वर्ष लग जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर तंत्र विकसित करना है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर, मशीन निर्माता और लॉजिस्टिक्स सभी शामिल हों। सरकारी जानकारी के अनुसार सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 10 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से चार गुजरात में विकसित हो रही हैं। साणंद में इस प्रकार की परियोजनाओं का तेजी से बढ़ना इसे ताइवान के हसिंचू और दक्षिण कोरिया के ग्योंगगी जैसे वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्रों की श्रेणी में ला रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र आने वाले समय में भारत के तकनीकी विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा और देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिलाएगा।

