क्रेडिट कार्ड सेक्टर की स्थिति
नई दिल्ली। भारत के Credit Card उद्योग में अगस्त महीने के दौरान खर्च में बढ़ोतरी की रफ्तार कमजोर रही। हालांकि Credit Card की संख्या में वृद्धि जारी रही और सालाना आधार पर कार्ड की संख्या में 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो जुलाई में 10.1 प्रतिशत थी।
बैंकों पर बढ़ता प्रतिस्पर्धी दबाव
HSBC और Jefferies की Reports के अनुसार, Credit Card सेक्टर में धीमी Spending Growth, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और Profitability पर दबाव प्रमुख चुनौतियां बनकर सामने आ रही हैं। अगस्त में करीब 12 लाख नए Credit Card जुड़े, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा लगभग 13 लाख था।
बड़े Issuers की हिस्सेदारी में गिरावट
अगस्त में छोटे Credit Card Issuers ने Market Share बढ़ाने में सफलता हासिल की, जबकि बड़े Issuers की हिस्सेदारी में कमी देखने को मिली। HSBC के अनुमान के अनुसार अगस्त में Credit Card Spending Growth 5.9 प्रतिशत रही, जबकि Jefferies ने इसे 5.5 प्रतिशत बताया। जुलाई में यह वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत थी।
UPI का डिजिटल भुगतान में दबदबा
Merchant Networks पर कुल Spending, जिसमें Cards और UPI P2M Transactions शामिल हैं, अगस्त में सालाना आधार पर करीब 19 प्रतिशत बढ़कर 11.3 ट्रिलियन रुपये पहुंच गई। यह Digital Payments में UPI की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
UPI MDR Framework से बदल सकता है समीकरण
15 अक्टूबर से लागू होने वाले UPI Merchant Discount Rate Framework से UPI और Credit Card के बीच Cost Gap कम होने की संभावना है, हालांकि Brokerage Firms Credit Card Segment को लेकर अभी भी सतर्क हैं।
MDR Charges में अंतर बना चुनौती
Eligible UPI P2M Transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जबकि Credit Card Transactions पर यह दर लगभग 1 से 3 प्रतिशत तक रहती है। वहीं, UPI QR Code के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे Merchants पर कोई MDR Charge नहीं लगेगा।
भविष्य में Credit Card Industry की चुनौती
RuPay Debit Card Transactions भी MDR से बाहर रहेंगे। हालांकि 2,000 रुपये से कम के करीब 96 प्रतिशत UPI Merchant Transactions पर नए Framework का असर सीमित रहने की उम्मीद है। ऐसे में Credit Card Industry को Growth बनाए रखने के लिए नए Strategies और बेहतर Customer Benefits पर ध्यान देना होगा।

