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सौर-पवन ऊर्जा से बढ़ेगी ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति

by Business Remedies
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  • जरूरतें होगी पूरी: कोल इंडिया की नई पहल
  • जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में विकसित होंगी ऊर्जा परियोजनाएं

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने राजस्थान में रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में कदम रखते हुए एक नई अनुषंगी इकाई, सीआईएल राजस्थान अक्षय ऊर्जा लिमिटेड, की स्थापना की है। यह संयुक्त उद्यम राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) के साथ शुरू किया गया है, जिसमें सीआईएल की 74 प्रतिशत और आरआरवीयूएनएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 12 जून 2025 को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से इसकी स्थापना का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। इस इकाई का लक्ष्य सौर, पवन, पंप्ड स्टोरेज और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करना है, जिससे राजस्थान की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

2025 में 1,000 मेगावाट का लक्ष्य
सीआईएल राजस्थान अक्षय ऊर्जा लिमिटेड का 2025 में 1,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इसमें 500-600 मेगावाट सौर ऊर्जा और 400-500 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। ये परियोजनाएं राजस्थान के सौर-प्रचुर क्षेत्रों और पवन ऊर्जा के लिए उपयुक्त जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में विकसित की जाएंगी। उत्पन्न बिजली को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 के तहत बेचा जाएगा या अन्य पात्र संस्थाओं को आपूर्ति की जाएगी। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

निवेश और आर्थिक प्रभाव
कोल इंडिया इस परियोजना के लिए 25,000 करोड़ का निवेश कर रही है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 2,500-3,000 मेगावाट सौर और 1,500 से 2,000 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता शामिल है। यह निवेश राजस्थान में 1,11,000 से अधिक रोजगार सृजन का अनुमान है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां सौर और पवन फार्म स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, यह कदम राजस्थान के 90 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य (2030 तक) में योगदान देगा, जिसमें 65 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है।

पर्यावरणीय- सामाजिक लाभ
यह पहल कोल इंडिया की नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करेंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। राजस्थान, जो पहले से ही 24.1 गीगावाट सौर और 5.2 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता के साथ अग्रणी है, इस पहल से और मजबूत होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पहुंच बढने से जीवन स्तर में सुधार होगा।

– राजस्थान की मरुभूमि को कभी अभिशाप समझा जाता था, लेकिन आज यह वरदान बन चुकी है। रेत के टीलों की वजह से यही मरुभूमि हमारे लिए एक आशीर्वाद बन रही है। आज इसी मरुभूमि पर विश्व का सबसे ज्यादा सोलर लगाया जा रहा है। सरकार से भी यही दरखास्त है, जिस मरुभूमि को हम खेती के काम में नहीं ले सकते हैं, वहां ज्यादा से ज्यादा सोलर प्लांट लगाए जाएं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की जा सके। इससे राजस्थान के साथ-साथ राजस्थान के लोगों का भी विकास सुनिश्चित है।
– नितिन अग्रवाल, सीईओ, राजस्थान सोलर एसोसिएशन

– हमें बड़े-बड़े प्लांट्स से हटकर घरेलू और छोटे-छोटे सिस्टम्स पर ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के साथ मिलकर व राज्य सरकार ने भी सोलर एनर्जी के लिए सब्सिडी की घोषणा की है। इस योजना में राज्य सरकार की ओर से 1.1 किलोवॉट के सिस्टम लगाए जाएंगे। सरकार जल्द से जल्द इस योजना को स्वीकृति दे, जिससे जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों के ग्रामीण इलाकों में सोलर एनर्जी की पहुंच बढ़े। सरकार को इसके लिए इन जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर भी डवलप करना होगा।
– अजय यादव, अध्यक्ष, राजस्थान अक्षय ऊर्जा संघ (रियर)



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