Wednesday, May 20, 2026 |
Home Banking and Insuranceडॉलर दबाव के बीच रुपया मजबूत, आरबीआई के फैसलों का असर दिखा

डॉलर दबाव के बीच रुपया मजबूत, आरबीआई के फैसलों का असर दिखा

by Business Remedies
0 comments
A visual depicting the Reserve Bank of India and the strength of the rupee

नई दिल्ली,

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में आंशिक ढील देने के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से करीब 2 प्रतिशत मजबूत हुआ है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले रुपया लगभग 95 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार में संतुलन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि वास्तविक हेजिंग की जरूरतों को समर्थन मिल सके और साथ ही सट्टा गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके। इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने रुपये में एकतरफा गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ कड़े कदम उठाए थे। हालांकि इन उपायों से घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार के लेनदेन में तरलता और पोजीशनिंग पर असर पड़ा था।

अब आरबीआई ने संबंधित पक्षों के बीच विदेशी मुद्रा लेनदेन, जैसे मौजूदा अनुबंधों को रद्द करना और उन्हें आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा, गैर-डिलिवरेबल फॉरवर्ड बाजार में जोखिम को संतुलित करने के लिए बैक-टू-बैक हेजिंग की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, बैंकों की कुल खुली स्थिति पर निर्धारित सीमा को यथावत रखा गया है। साथ ही, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन में संबंधित पक्षों के साथ बैंकों के कुछ व्यवहार पर पहले जैसी पाबंदियां जारी रहेंगी। आरबीआई के गवर्नर ने पहले ही संकेत दिया था कि ये प्रतिबंध अस्थायी हो सकते हैं। बैंकों ने भी रुपये से जुड़े जोखिमों के लिए वास्तविक हेजिंग की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत की मांग की थी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को तत्काल डॉलर खरीद कम करने और इसके बजाय एक विशेष ऋण सुविधा का उपयोग करने के लिए कहा गया था। इससे रुपये को और मजबूती मिलने में मदद मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पहले भी वैश्विक तेल संकट के दौरान उठाए गए उपायों जैसा है, जिसका उद्देश्य डॉलर की मांग को नियंत्रित करना और रुपये की कमजोरी को सीमित करना था। हालांकि, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन अभी भी बना हुआ है। आगे चलकर वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा बाजार की चाल अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन ऐसे कदमों से रुपये में तेज गिरावट की आशंका फिलहाल कम होती दिखाई दे रही है।



You may also like

Leave a Comment